Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 5/15/3

31 Sukta
11 Mantra
5/15/3
Devata- मधुलौषधिः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- रोगोपशमन सूक्त
Mantra with Swara
ति॒स्रश्च॑ मे त्रिं॒शच्च॑ मेऽपव॒क्तार॑ ओषधे। ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः ॥

ति॒स्र: । च॒ । मे॒ । त्रिं॒शत् । च॒ । मे॒ । च॒ । मे॒ । अ॒प॒ऽव॒क्तार॑: । ओ॒ष॒धे॒ । ऋत॑ऽजाते । ऋत॑ऽवारि । मधु॑ । मे॒ । म॒धु॒ला । क॒र॒:॥१५.३॥

Mantra without Swara
तिस्रश्च मे त्रिंशच्च मेऽपवक्तार ओषधे। ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला करः ॥

तिस्र: । च । मे । त्रिंशत् । च । मे । च । मे । अपऽवक्तार: । ओषधे । ऋतऽजाते । ऋतऽवारि । मधु । मे । मधुला । कर:॥१५.३॥

Meaning
(मे) = मेरे (तिनः च) = तीन तथा (मे त्रिंशत् च) = मेरे तीस अर्थात शरीरस्थ मेरे तेतीस देव (अपवक्तार:) = सब दोषों को रोकनेवाले हों-सब दोषों को मुझसे दूरे करनेवाले हों। शेष पूर्ववत् ।
Essence
जीवन में सदा ही दोषों के आजाने की सम्भावना बनी रहती है। मैं सदा वेदवाणी को अपनाते हुए दोषों को दूर रखने के लिए यत्नशील रहूँ।


 
Subject
तेतीस से एकसौ दस तक

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.