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Atharvaveda - Mantra 11

Atharvaveda 5/15/11

31 Sukta
11 Mantra
5/15/11
Devata- मधुलौषधिः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- रोगोपशमन सूक्त
Mantra with Swara
श॒तं च॑ मे स॒हस्रं॑ चापव॒क्तार॑ ओषधे। ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः ॥

श॒तम् । च॒ । मे॒ । स॒हस्र॑म् । च॒ । अ॒प॒ऽव॒क्तार॑: । ओ॒ष॒धे॒ । ऋत॑ऽजाते । ऋत॑ऽवरि । मधु॑ ।मे॒ । म॒धु॒ला । क॒र॒: ॥१५.११॥

Mantra without Swara
शतं च मे सहस्रं चापवक्तार ओषधे। ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला करः ॥

शतम् । च । मे । सहस्रम् । च । अपऽवक्तार: । ओषधे । ऋतऽजाते । ऋतऽवरि । मधु ।मे । मधुला । कर: ॥१५.११॥

Meaning
१. मे (शतम् च) = मेरे जीवन के सौ वर्ष (च) = तथा (सहस्त्रम्) = हजारों वर्ष भी (अपवक्तार:) = बुराइयों व अपयश को मुझसे दूर रखनेवाले हों। शेष पूर्ववत्।
Essence
यहाँ सहल के साथ 'मे' जोड़ना बहुत महत्त्वपूर्ण है। हजारों वर्ष तक जीना सामान्यतया सम्भव नहीं, परन्तु हज़ारों वर्ष तक भी मैं अपयश से बचा रहे। मेरी अपकीर्ति न हो।
Subject
अपक्षय से दूर
Special
जीवन को मधुर बनाता हुआ यह सबके प्रति मधुर वाणी बोलता हुआ सबका मित्र बनता है, अतः विश्वामित्र कहलाता है। यही अगले सूक्त का ऋषि है।

 

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