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Atharvaveda - Mantra 10

Atharvaveda 5/15/10

31 Sukta
11 Mantra
5/15/10
Devata- मधुलौषधिः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- रोगोपशमन सूक्त
Mantra with Swara
दश॑ च मे श॒तं च॑ मेऽपव॒क्तार॑ ओषधे। ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः ॥

दश॑ । च॒ । मे॒ । श॒तम् । च॒ । मे॒ । अ॒प॒ऽव॒क्तार॑: । ओ॒ष॒धे॒ । ऋत॑ऽजाते । ऋत॑ऽवारि । मधु॑ । मे॒ । म॒धु॒ला । क॒र॒:॥१५.१०॥

Mantra without Swara
दश च मे शतं च मेऽपवक्तार ओषधे। ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला करः ॥

दश । च । मे । शतम् । च । मे । अपऽवक्तार: । ओषधे । ऋतऽजाते । ऋतऽवारि । मधु । मे । मधुला । कर:॥१५.१०॥

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1 Bhashyas
Meaning
मेरे जीवन के एक सौ दस वर्ष मुझसे दोषों को पृथक् रखनेवाले हों। शेष पूर्ववत्।
Essence
जीवन में सदा ही दोषों के आजाने की सम्भावना बनी रहती है। मैं सदा वेदवाणी को अपनाते हुए दोषों को दूर रखने के लिए यत्नशील रहूँ।
Subject
तेतीस से एकसौ दस तक