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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 5/15/1

31 Sukta
11 Mantra
5/15/1
Devata- मधुलौषधिः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- रोगोपशमन सूक्त
Mantra with Swara
एका॑ च मे॒ दश॑ च मेऽपव॒क्तार॑ ओषधे। ऋत॑जात॒ ऋता॑वरि॒ मधु॑ मे मधु॒ला क॑रः ॥

‍एका॑ । च॒ । मे॒ । दश॑ । च॒ । मे॒ । अ॒प॒ऽव॒क्तार॑: । ओ॒ष॒धे॒ । ऋत॑ऽजाते । ऋत॑ऽवारि । मधु॑ । मे॒ । म॒धु॒ला । क॒र॒:॥१५.१॥

Mantra without Swara
एका च मे दश च मेऽपवक्तार ओषधे। ऋतजात ऋतावरि मधु मे मधुला करः ॥

‍एका । च । मे । दश । च । मे । अपऽवक्तार: । ओषधे । ऋतऽजाते । ऋतऽवारि । मधु । मे । मधुला । कर:॥१५.१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. इस सूक्त का देवता वनस्पति [वन-A ray of light] प्रकाश की किरणों की रक्षक वेदवाणी है। इसमें प्रभु हमारे लिए प्रकाश की किरणों को प्राप्त कराते है! यह दोषों का दहन करने के कारण ओषधि है। है (ओषधे) = दोषदाहक शक्ति को धारण करनेवाली वेदवाणि! तू (ऋतजाते) = उस पूर्ण ऋतस्वरूप प्रभु से उत्पन्न हुई है, (ऋतावरि) = सत्यज्ञानवाली है, (मे मधुला) = मेरे लिए मधु को लानेवाली तु (मधु कर:) = माधुर्य को करनेवाली है। २. हे वेदवाणि! (एका च मे दश च मे) = मेरी एक आत्मिक शक्ति तथा मेरी दसों इन्द्रियाँ (अपवक्तार:) = मुझसे सब बुराइयों को दूर करनेवाली हों। [Speaking away, warning off, preventing, averting]।
Essence
वेदवाणी मेरे जीवन मे माधुर्य को उत्पन्न करे । मेरी आत्मशक्ति व दसौं इन्द्रियाँ बुराई को मुझसे पृथक् करें।

 
Subject
ग्यारह