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Atharvaveda - Mantra 8

Atharvaveda 5/14/8

31 Sukta
13 Mantra
5/14/8
Devata- कृत्यापरिहरणम् Rishi- शुक्रः Chhanda- त्रिपदा विराडनुष्टुप् Suktam- कृत्यापरिहरण सूक्त
Mantra with Swara
अग्ने॑ पृतनाषा॒ट्पृत॑नाः सहस्व। पुनः॑ कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृते॑ प्रति॒हर॑णेन हरामसि ॥

अग्ने॑ । पृ॒त॒ना॒षा॒ट् । पृत॑ना: । स॒ह॒स्व॒ । पुन॑: । कृ॒त्याम् । कृ॒त्या॒ऽकृते॑ । प्र॒ति॒ऽहर॑णेन । ह॒रा॒म॒सि॒ ॥१४.८॥

Mantra without Swara
अग्ने पृतनाषाट्पृतनाः सहस्व। पुनः कृत्यां कृत्याकृते प्रतिहरणेन हरामसि ॥

अग्ने । पृतनाषाट् । पृतना: । सहस्व । पुन: । कृत्याम् । कृत्याऽकृते । प्रतिऽहरणेन । हरामसि ॥१४.८॥

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1 Bhashyas
Meaning
१.हे (अग्ने) = राष्ट्र को उन्नति-पथ पर ले-चलनेवाले राजन्! आप (पृतनाषाट्) = शत्रु-सैन्यों का पराभव करनेवाले हैं, (पृतना: सहस्व) = इन शत्रु-सैन्यों का पराभव कीजिए। २. (कृत्याम्) = छेदन भेदन की क्रिया को (कृत्याकृते) = इस छेदन क्रिया करनेवाले के लिए (पुन:) = फिर (प्रतिहरणेन) = वापस लौटाने के द्वारा (हरामसि) = विनष्ट करते हैं। कृत्या जब इस कृत्याकृत् को प्राप्त होती है तब उसे इसकी हानि का प्रत्यक्ष अनुभव होता है और वह इसे न करने का निश्चय करता है। इसप्रकार कृत्या का विनाश हो जाता है।
Essence
राजा सैन्यों के द्वारा आक्रान्ता शत्रु-सैन्यों का पराभव करता हुआ उन्हें पुनः छेदन-भेदन करने की क्रिया से रोकता है ।
Subject
प्रतिहरणेन