Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 4/6/2

40 Sukta
8 Mantra
4/6/2
Devata- द्यावापृथिवी, सप्तसिन्धुः Rishi- गरुत्मान् Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- विषघ्न सूक्त
Mantra with Swara
याव॑ती॒ द्यावा॑पृथि॒वी व॑रि॒म्णा याव॑त्स॒प्त सिन्ध॑वो वितष्ठि॒रे। वाचं॑ वि॒षस्य॒ दूष॑णीं॒ तामि॒तो निर॑वादिषम् ॥

याव॑ती॒ । इति॑ । द्यावा॑पृथि॒वी इति॑ । व॒रि॒म्णा । याव॑त् । स॒प्त । सिन्ध॑व: । वि॒ऽत॒स्थि॒रे । वाच॑म् । वि॒षस्य॑ । दूष॑णीम् । ताम् । इ॒त: । नि:। अ॒वा॒दि॒ष॒म् ॥६.२॥

Mantra without Swara
यावती द्यावापृथिवी वरिम्णा यावत्सप्त सिन्धवो वितष्ठिरे। वाचं विषस्य दूषणीं तामितो निरवादिषम् ॥

यावती । इति । द्यावापृथिवी इति । वरिम्णा । यावत् । सप्त । सिन्धव: । विऽतस्थिरे । वाचम् । विषस्य । दूषणीम् । ताम् । इत: । नि:। अवादिषम् ॥६.२॥

Meaning
१. (यावती) = जितने ये (द्यावापृथिवी) = द्युलोक व पृथिवीलोक (वरिम्णा) = विस्तार से फैले हैं, (यावत्) = जहाँ तक ये (सप्त सिन्धवः) = सात समुद्र (वितष्ठिरे) = विशेषमा रो रिशत हुए हैं, (इतः) = इस सारे प्रदेश से (ताम्) = उस (विषस्य दूषणीम्) = विष को दूषित करनेवाली, अर्थात विषप्रभाव को नष्ट करनेवाली (वाचम्) = मधुर ज्ञान की वाणी को (निरवादिषम्) = मैंने निश्चय से व्यक्तरूप से कहा। २. हम मधुर ज्ञान की वाणियों का उच्चारण करते हुए लोकहृदय से विषभरे भावों को दूर करने का प्रयत्न करें।
Essence
हम उस ज्ञानमयी मधुरवाणी का उच्चारण करें जो लोगों के हृदयों से विषैले भावों को दूर करनेवाली हो।
Subject
विषैली भावना को दूर करना

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.