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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 4/5/3

40 Sukta
7 Mantra
4/5/3
Devata- वृषभः, स्वापनम् Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- स्वापन सूक्त
Mantra with Swara
प्रो॑ष्ठेश॒यास्त॑ल्पेश॒या नारी॒र्या व॑ह्य॒शीव॑रीः। स्त्रियो॒ याः पुण्य॑गन्धय॒स्ताः सर्वाः॑ स्वापयामसि ॥

प्रो॒ष्ठे॒ऽश॒या: । त॒ल्पे॒ऽश॒या: । नारी॑: । या: । व॒ह्य॒ऽशीव॑री: । स्रिय॑: । या: । पुण्य॑ऽगन्धय: । ता: । सर्वा॑: । स्वा॒प॒या॒म॒सि॒ ॥५.३॥

Mantra without Swara
प्रोष्ठेशयास्तल्पेशया नारीर्या वह्यशीवरीः। स्त्रियो याः पुण्यगन्धयस्ताः सर्वाः स्वापयामसि ॥

प्रोष्ठेऽशया: । तल्पेऽशया: । नारी: । या: । वह्यऽशीवरी: । स्रिय: । या: । पुण्यऽगन्धय: । ता: । सर्वा: । स्वापयामसि ॥५.३॥

Meaning
१. अवस्था-भेद के अनुसार कोई नारी कहीं सोई है और कोई कहीं। (प्रोष्ठेशया:) = [प्रोष्ठ] जो दस-बारह वर्ष की कुमारियाँ छोटे-छोटे फलकों पर सोई हैं। (तल्पेशया:) = जो युवतियाँ खाटों पर सो रही हैं, (याः नारी:) = जो स्त्रियों अभी बहुत छोटी अवस्था में होने से (बहाशीवरी:) = आन्दोलिका-हिंडोले में ही सो रही हैं तथा (या:) = जो (पुण्यगन्धयः) = पुण्यगन्धवाली (स्त्रिय:) = विवाहित स्त्रियाँ हैं, (ताः सर्वाः) = उन सबको (स्वापयामसि) = हम सुलाते हैं।
Essence
घरों में स्त्रियों का कमरा इसप्रकार सुरक्षित हो कि वे निश्चिन्त होकर सो सकें। यह निश्चिन्तता की निद्रा उन्हें स्वस्थ बनाएगी और वे घर को बड़ा उत्तम बना सकेंगी।
Subject
स्त्रियों की निभीक निद्रा

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