Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 4/36/3

40 Sukta
10 Mantra
4/36/3
Devata- सत्यौजा अग्निः Rishi- चातनः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- सत्यौजा अग्नि सूक्त
Mantra with Swara
य आ॑ग॒रे मृ॒गय॑न्ते प्रतिक्रो॒शेऽमा॑वा॒स्ये॑। क्र॒व्यादो॑ अ॒न्यान्दिप्स॑तः॒ सर्वां॒स्तान्त्सह॑सा सहे ॥

ये । आ॒ऽग॒रे । मृ॒गय॑न्ते । प्र॒ति॒ऽक्रो॒शे । अ॒मा॒ऽवा॒स्ये᳡ ।क्र॒व्य॒ऽअद॑: । अ॒न्यान् । दिप्स॑त: । सर्वा॑न् । तान् । सह॑सा । स॒हे॒ ॥३६.३॥

Mantra without Swara
य आगरे मृगयन्ते प्रतिक्रोशेऽमावास्ये। क्रव्यादो अन्यान्दिप्सतः सर्वांस्तान्त्सहसा सहे ॥

ये । आऽगरे । मृगयन्ते । प्रतिऽक्रोशे । अमाऽवास्ये ।क्रव्यऽअद: । अन्यान् । दिप्सत: । सर्वान् । तान् । सहसा । सहे ॥३६.३॥

Meaning
१. (ये) = जो हमें आगरे [आ गीर्यते समन्ताद् युज्यते अत्र] भोजनालय [Hotel] में (मृगयन्ते) = मारने के लिए ढूंढते फिरते हैं, प्रतिकोशे-प्रतिकूल शत्रुओं से किये हुए आक्रोश के अवसर पर-कलह के अवसर पर (अमावास्ये) = अमावास्या की रात्रि में अन्धकार में मारने के लिए खोजते फिरते हैं, इन (व्यादः) = मांसभोजी (अन्यान् दिप्सतः) = औरों को मारने की इच्छा करनेवाले (तान् सर्वान)  उन सबको (सहसा) = शत्रुमर्षक बल के द्वारा (सहे) = पराभूत करता हूँ।
Essence
भोजनालयों में, कलहों के अवसर पर, अन्धकारमयी रात्रि में जो औरों को मारने की इच्छा करते हैं, 'वैश्वानर अग्नि' उन सबको बल से पराभूत करें।
Subject
आगरे प्रतिक्रोशे अमावास्ये

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.