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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 4/30/2

40 Sukta
8 Mantra
4/30/2
Devata- सर्वरूपा सर्वात्मिका सर्वदेवमयी वाक् Rishi- अथर्वा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- राष्ट्रदेवी सुक्त
Mantra with Swara
अ॒हं राष्ट्री॑ सं॒गम॑नी॒ वसू॑नां चिकि॒तुषी॑ प्रथ॒मा य॒ज्ञिया॑नाम्। तां मा॑ दे॒वा व्य॑दधुः पुरु॒त्रा भूरि॑स्थात्रां॒ भूर्या॑वे॒शय॑न्तः ॥

अ॒हम् । राष्ट्री॑ । स॒म्ऽगम॑नी । वसू॑नाम् । चि॒कि॒तुषी॑ । प्र॒थ॒मा । य॒ज्ञिया॑नाम् । ताम् । मा॒ । दे॒वा: । वि । अ॒द॒धु॒: । पु॒रु॒ऽत्रा । भूरि॑ऽस्थात्राम् । भूरि॑ । आ॒ऽवे॒शय॑न्त: ॥३०.२॥

Mantra without Swara
अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्। तां मा देवा व्यदधुः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तः ॥

अहम् । राष्ट्री । सम्ऽगमनी । वसूनाम् । चिकितुषी । प्रथमा । यज्ञियानाम् । ताम् । मा । देवा: । वि । अदधु: । पुरुऽत्रा । भूरिऽस्थात्राम् । भूरि । आऽवेशयन्त: ॥३०.२॥

Meaning
१. (अहम् राष्ट्री) = मैं ही इस विश्वराष्ट्र की शासिका-ईश्वरी हूँ, (वसूनां संगमनी) = सब वसुओं को-निवास के लिए धनों को प्राप्त करानेवाली हूँ, (चिकितुषी) = ज्ञानवाली हूँ, अतएव (यज्ञियानां प्रथमा) =  उपास्यों में प्रथम हूँ। २. (ताम्) = उस (मा) = मुझे (देवा:) = देववृत्ति के लोग (पुरुत्रा) = पालन व पूरण के दृष्टिकोण से खूब ही (व्यदधुः) = धारण करते हैं। उस मुझे धारण करते हैं जोकि (भूरिस्थानाम्) = पालक व पोषकरूप में सर्वत्र स्थित हूँ तथा (भूरि आवेशयन्त:) = पालक व पोषक तत्वों को सब जीवों में प्रवेश करानेवाली हूँ। प्रभु सूर्यादि देवों को भी देवत्त्व प्राप्त कराते हैं तथा सब जीवों का पोषण भी वही करते हैं।
Essence
प्रभु ही सबके शासक और सबके आधार हैं।
Subject
'सबके शासक, सबके आधार' प्रभु

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