Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 4/19/5

40 Sukta
8 Mantra
4/19/5
Devata- अपामार्गो वनस्पतिः Rishi- शुक्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- अपामार्ग सूक्त
Mantra with Swara
वि॑भिन्द॒ती श॒तशा॑खा विभि॒न्दन्नाम॑ ते पि॒ता। प्र॒त्यग्वि भि॑न्धि॒ त्वं तं यो अ॒स्माँ अ॑भि॒दास॑ति ॥

वि॒ऽभि॒न्द॒ती । श॒तऽशा॑खा । वि॒ऽभि॒न्दन् । नाम॑ । ते॒ । पि॒ता । प्र॒त्यक् । वि । भि॒न्धि॒ । त्वम् । तम् । य: । अ॒स्मान् । अ॒भि॒ऽदास॑ति ॥१९.५॥

Mantra without Swara
विभिन्दती शतशाखा विभिन्दन्नाम ते पिता। प्रत्यग्वि भिन्धि त्वं तं यो अस्माँ अभिदासति ॥

विऽभिन्दती । शतऽशाखा । विऽभिन्दन् । नाम । ते । पिता । प्रत्यक् । वि । भिन्धि । त्वम् । तम् । य: । अस्मान् । अभिऽदासति ॥१९.५॥

Meaning
१.हे अपामार्ग औषधे! (शतशाखा) = अपरिमित शाखाओंवाली होती हुई त (विभिन्दती) = विभेदनशीला है-रोगों का भेदन करनेवाली है, (ते) = तेरा (पिता) = उत्पादक भी तेरे द्वारा रोगों का भेदन करने के कारण विभिन्दन-विभेदक (नाम) = नामवाला है। २. अत: (त्वम) = तू (तम्) = उस हमारे शत्रुभूत रोग को (प्रत्यग) = उसकी और जाकर [प्रति अञ्च] उसपर आक्रमण करके (भिन्धि) = विदीर्ण कर, (य:) = जो रोग (अस्मान्) = हमें (अभिदासति) = उपक्षीण करता है। हमारा क्षय करनेवाले इन रोगों को तुझे ही नष्ट करना है।
Essence
रोगों का भेदन करनेवाला अपामार्ग "विभिन्दती' है। यह हमारा भेदन करनेवाले रोग का भेदन करता है।
Subject
अपामार्ग-विभिन्दती

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.