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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 4/18/6

40 Sukta
8 Mantra
4/18/6
Devata- अपामार्गो वनस्पतिः Rishi- शुक्रः Chhanda- बृहतीगर्भानुष्टुप् Suktam- अपामार्ग सूक्त
Mantra with Swara
यश्च॒कार॒ न श॒शाक॒ कर्तुं॑ श॒श्रे पाद॑म॒ङ्गुरि॑म्। च॒कार॑ भ॒द्रम॒स्मभ्य॑मा॒त्मने॒ तप॑नं॒ तु सः ॥

य: । च॒कार॑ । न । श॒शाक॑ । कर्तु॑म् । श॒श्रे । पाद॑म् । अ॒ङ्गुरि॑म् । च॒कार॑ । भ॒द्रम् । अ॒स्मभ्य॑म् । आ॒त्मने॑ । तप॑नम् । तु । स: ॥१८.६॥

Mantra without Swara
यश्चकार न शशाक कर्तुं शश्रे पादमङ्गुरिम्। चकार भद्रमस्मभ्यमात्मने तपनं तु सः ॥

य: । चकार । न । शशाक । कर्तुम् । शश्रे । पादम् । अङ्गुरिम् । चकार । भद्रम् । अस्मभ्यम् । आत्मने । तपनम् । तु । स: ॥१८.६॥

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Meaning
१. (यः) = जो शत्रु (चकार) = हिंसन-कार्य करता है, और इस हिंसन-कार्य द्वारा (पादम्) = एक पाँव को अथवा (अंगुरिम्) = एक अंगुलि को (शश्रे) = हिंसित करता है, वह शत्रु (कर्तुं न शशाक) = हिंसन कार्य को करने में समर्थ नहीं होता। २. वस्तुतः (सः) = वह शत्रु इन हिंसन-प्रयोगों से (अस्मभ्यम्) = हमारे लिए (भद्रं चकार) = कल्याण ही करता है, (आत्मने तु) = अपने लिए तो (तपनम्) = दहन को करनेवाला होता है। ये हिंसन के प्रयोग हमें धैर्य धारण का अवसर देते हैं और इनका प्रयोक्ता अपने ही हृदय में विषैली वासनाओं को जन्म देनेवाला होता है।
Essence
जो दूसरों का हिंसन करने का प्रत्यन करता है, वह वस्तुत: अपना ही अमङ्गल करता है।
Subject
अपने पाँव पर ही कुठाराघात