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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 4/18/4

40 Sukta
8 Mantra
4/18/4
Devata- अपामार्गो वनस्पतिः Rishi- शुक्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- अपामार्ग सूक्त
Mantra with Swara
सह॑स्रधाम॒न्विशि॑खा॒न्विग्री॑वां छायया॒ त्वम्। प्रति॑ स्म च॒क्रुषे॑ कृ॒त्यां प्रि॒यां प्रि॒याव॑ते हर ॥

सह॑स्रऽधामन् । विऽशि॑खान् । विऽग्री॑वान् । शा॒य॒य॒ । त्वम् । प्रति॑ । स्म॒ । च॒क्रुषे॑ । कृ॒त्याम् । प्रि॒याम् । प्रि॒यऽव॑ते । ह॒र॒ ॥१८.४॥

Mantra without Swara
सहस्रधामन्विशिखान्विग्रीवां छायया त्वम्। प्रति स्म चक्रुषे कृत्यां प्रियां प्रियावते हर ॥

सहस्रऽधामन् । विऽशिखान् । विऽग्रीवान् । शायय । त्वम् । प्रति । स्म । चक्रुषे । कृत्याम् । प्रियाम् । प्रियऽवते । हर ॥१८.४॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (सहस्त्रधामन्) = अनन्त तेजोंवाले प्रभो! (त्वम्) = आप हमारे इन कृत्या [हिंसा] करनेवाले शत्रुओं को (विशिखान्) = विच्छिन्न केशोंवाला व (विग्रीवान्) = छिन्न ग्रीवा व शिरोंवाला करके शामय भूमि पर सुला दीजिए। २. इस (कृत्याम्) = हिंसा की क्रिया को (चक्रुषे) इस कृत्या को करनेवाले के (प्रति हरस्म) = हर प्रकार वापस प्राप्त कराइए जैसेकि (प्रियाम्) = प्रिय पत्नी को (प्रियावते) = उस प्रियावाले के लिए-पति के लिए प्राप्त कराया जाता है। खोई हुई पत्नी को जैसे पति के पास पहुँचाते हैं, इसीप्रकार इस हिंसा की क्रिया को प्रभु इसे करनेवाले को ही प्रास कराएं।
Essence
औरों का हिंसन करनेवाले लोग प्रभु की व्यवस्था से स्वयं हिंसित हों।
Subject
प्रियां प्रियावते