Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 4/17/6

40 Sukta
8 Mantra
4/17/6
Devata- अपामार्गो वनस्पतिः Rishi- शुक्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- अपामार्ग सूक्त
Mantra with Swara
क्षु॑धामा॒रं तृ॑ष्णामा॒रम॒गोता॑मनप॒त्यता॑म्। अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॑ मृज्महे ॥

क्षु॒धा॒ऽमा॒रम् । तृ॒ष्णा॒ऽमा॒रम् । अ॒गोता॑म् । अ॒न॒प॒ऽत्यता॑म् । अपा॑मार्ग: । त्वया॑ । व॒यम् । सर्व॑म् । तत् । अप॑ । मृ॒ज्म॒हे॒ ॥१७.६॥

Mantra without Swara
क्षुधामारं तृष्णामारमगोतामनपत्यताम्। अपामार्ग त्वया वयं सर्वं तदप मृज्महे ॥

क्षुधाऽमारम् । तृष्णाऽमारम् । अगोताम् । अनपऽत्यताम् । अपामार्ग: । त्वया । वयम् । सर्वम् । तत् । अप । मृज्महे ॥१७.६॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१.(क्षुधामारम) = भूख की पीड़ा से मनुष्य को मार डालनेवाले [भस्मक रोग] अथवा जिसमें भूख मारी जाती है, उस रोग को (तृष्णामारम्) = जो प्यास के अतिशय से मनुष्य को मार डालता है, अथवा जिसमें प्यास ही नष्ट हो जाती है, (अगोताम्) = इन्द्रियों के शैथिल्य को उत्पन्न करनेवाले रोग को तथा (अनपत्यताम्) = सन्तानहीनता [नपुंसकता] के रोग को हे (अपामार्ग) = अपामार्ग! (त्वया) = तेरे द्वारा (वयम्) = हम (तत् सर्वम्) = उस सबको (अपमृज्महे) = विनष्ट कर डालते हैं।
Essence
हम 'भूख-प्यास' के अभावजनक रोग को, इन्द्रिय-शैथिल्य व नपुंसकता को अपामार्ग के प्रयोग से विनष्ट करते हैं।
Subject
अनपत्यता निवारण