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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 4/17/2

40 Sukta
8 Mantra
4/17/2
Devata- अपामार्गो वनस्पतिः Rishi- शुक्रः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- अपामार्ग सूक्त
Mantra with Swara
स॑त्य॒जितं॑ शपथ॒याव॑नीं॒ सह॑मानां पुनःस॒राम्। सर्वाः॒ सम॒ह्व्योष॑धीरि॒तो नः॑ पारया॒दिति॑ ॥

स॒त्य॒ऽजित॑म् । श॒प॒थ॒ऽयाव॑नीम् । सह॑मानम् । पु॒न॒:ऽस॒राम् । सर्वा॑: । सम् । अ॒ह्वि॒ । ओष॑धी: । इ॒त: । न॒: । पा॒र॒या॒त् । इति॑ ॥१७.२॥

Mantra without Swara
सत्यजितं शपथयावनीं सहमानां पुनःसराम्। सर्वाः समह्व्योषधीरितो नः पारयादिति ॥

सत्यऽजितम् । शपथऽयावनीम् । सहमानम् । पुन:ऽसराम् । सर्वा: । सम् । अह्वि । ओषधी: । इत: । न: । पारयात् । इति ॥१७.२॥

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Meaning
१. (सत्यजितम्) = सचमुच रोगों को जीतनेवाली (शपथयावनीम्) = पीड़ाजनित आक्रोशों को दूर करनेवाली, (सहमानाम्) = रोगों को अभिभूत करनेवाली (पुन: सराम्) = अनेक व्याधियों की निवृत्ति के लिए फिर-फिर मलों का नि:सारण करनेवाली इस अपामार्ग ओषधि को (सम् अव्हि) = मैं पुकारता हूँ। २. इसीप्रकार में अन्य भी (सर्वाः ओषधी:) = सब ओषधियों को पुकारता हूँ इति जिससे यह ओषधि (इतः) इस रोग से (न:) = हमें (पारयात्) = पार करे।
Essence
मैं रोग-निवारक ओषधियों का आह्वान करता हूँ और इनके ठीक प्रयोग से नीरोग बनता हूँ।
Subject
'शपथयाबनी' औषधि