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Atharvaveda - Mantra 13

Atharvaveda 4/15/13

40 Sukta
16 Mantra
4/15/13
Devata- मण्डूकसमूहः, पितरगणः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वृष्टि सूक्त
Mantra with Swara
सं॑वत्स॒रं श॑शया॒ना ब्रा॑ह्म॒णा व्र॑तचा॒रिणः॑। वाचं॑ प॒र्जन्य॑जिन्वितां॒ प्र म॒ण्डूका॑ अवादिषुः ॥

स॒म्ऽव॒त्स॒रम् । श॒श॒या॒ना: । ब्रा॒ह्म॒णा: । व्र॒त॒ऽचा॒रिण॑: । वाच॑म् । प॒र्जन्य॑ऽजिन्विताम् । प्र । म॒ण्डूका॑: । अ॒वा॒दि॒षु॒: ॥१५.१३॥

Mantra without Swara
संवत्सरं शशयाना ब्राह्मणा व्रतचारिणः। वाचं पर्जन्यजिन्वितां प्र मण्डूका अवादिषुः ॥

सम्ऽवत्सरम् । शशयाना: । ब्राह्मणा: । व्रतऽचारिण: । वाचम् । पर्जन्यऽजिन्विताम् । प्र । मण्डूका: । अवादिषु: ॥१५.१३॥

Meaning
१. (मण्डूका:) = मेंढक (पर्जन्यजिन्विताम्) = मेष [बादल] से प्रेरित (वाचम्) = वाणी को (प्र अवादिषुः) = इसप्रकार खूब ही उच्चरित करते हैं, जैसेकि (संवत्सरम्) = वर्षभर (शशयाना:) = एक स्थान पर निवास करनेवाले (व्रतचारिणः) = मौनव्रत का पालन करेनवाले (ब्राह्मणा:) = ब्राह्मण व्रत समासि पर वाणी को उच्चरित करते हैं।
Essence
वर्षा होने पर मेंढकों की आवाज़ ऐसी प्रतीत होती है, जैसे वार्षिक मौनव्रत की समासि पर ज्ञानी ब्राह्मणों की वाणी ही उच्चरित हुई हो।
Subject
व्रतचारी ब्राह्मणों के समान

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