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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 3/5/1

31 Sukta
8 Mantra
3/5/1
Devata- सोमः, पर्णमणिः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- राजा ओर राजकृत सूक्त
Mantra with Swara
आयम॑गन्पर्णम॒णिर्ब॒ली बले॑न प्रमृ॒णन्त्स॒पत्ना॑न्। ओजो॑ दे॒वानां॒ पय॒ ओष॑धीनां॒ वर्च॑सा मा जिन्व॒त्वप्र॑यावन् ॥

आ । अ॒यम् । अ॒ग॒न् । प॒र्ण॒ऽम॒णि: । ब॒ली । बले॑न । प्र॒ऽमृ॒णन् । स॒ऽपत्ना॑न् । ओज॑: । दे॒वाना॑म् । पय॑: । ओष॑धीनाम् । वर्च॑सा । मा॒ । जि॒न्व॒तु॒ । अप्र॑ऽयावन् ॥५.१॥

Mantra without Swara
आयमगन्पर्णमणिर्बली बलेन प्रमृणन्त्सपत्नान्। ओजो देवानां पय ओषधीनां वर्चसा मा जिन्वत्वप्रयावन् ॥

आ । अयम् । अगन् । पर्णऽमणि: । बली । बलेन । प्रऽमृणन् । सऽपत्नान् । ओज: । देवानाम् । पय: । ओषधीनाम् । वर्चसा । मा । जिन्वतु । अप्रऽयावन् ॥५.१॥

Meaning
१. (अयम्) = यह (पर्णमणि:) = पालक व पूरक तथा वानस्पतिक पदार्थों से उत्पन्न मणि [सोम] (मा) = मुझे (आ अगन्) = प्राप्त हुई है, (बली) = यह प्रशस्त बलोंवाली है। (बलेन) = बल से (सपत्नान्) = रोगरूप शत्रुओं को (प्रमृणन्) = मसल देनेवाली है। २. यह (देवानां ओजः) = देवों का ओज है। इस सोम रक्षण से ही देव औजस्वी बनते हैं। यह (ओषधीनाम्) = ओषधियों का-वानस्पतिक पदार्थों का (पयः) = वीर्य [Semen virile] है। यह (अप्रयावन्) = [मां विहाय अनपगन्ता सन्] मुझे छोड़कर न जाता हुआ-मुझमें ही सुरक्षित होता हुआ (मा) = मुझे (वर्चसा) = तेज से (जिन्वतु) = प्रीणित करे। यह मुझे तेजस्वी बनाए।
Essence
शरीर में वानस्पतिक पदार्थों के सेवन से उत्पन्न सोम शरीर में ही सुरक्षित होता हुआ हमारे रोगरूप शत्रुओं का संहार करता है और हमें वर्चस्वी बनाता है।
Subject
पर्णमणि

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