Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 3/28/4

31 Sukta
6 Mantra
3/28/4
Devata- यमिनी Rishi- ब्रह्मा Chhanda- यवमध्या विराट्ककुप् Suktam- पशुपोषण सूक्त
Mantra with Swara
इ॒ह पुष्टि॑रि॒ह रस॑ इ॒ह स॑हस्र॒सात॑मा भव। प॒शून्य॑मिनि पोषय ॥

इ॒ह । पुष्टि॑: । इ॒ह । रस॑: । इ॒ह । स॒ह॒स्र॒ऽसात॑मा । भ॒व॒ । प॒शून् । य॒मि॒नि॒ । पो॒ष॒य॒ ॥२८.४॥

Mantra without Swara
इह पुष्टिरिह रस इह सहस्रसातमा भव। पशून्यमिनि पोषय ॥

इह । पुष्टि: । इह । रस: । इह । सहस्रऽसातमा । भव । पशून् । यमिनि । पोषय ॥२८.४॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. यमिनी बुद्धि के कारण (इह) = यहाँ-हमारे घरों में (पुष्टि:) = उचित पोषण हो। (इह) = यहाँ रस:-रस हो-आपस के मधुर व्यवहार के कारण आनन्द-ही-आनन्द हो। २. हे (यमिनि) = संयत बुद्धि! तू (इह) = यहाँ (सहस्त्रसातमा) = सहस्रों धनों को अतिशयेन प्रास करनेवाली (भव) = हो। २. तू (पशून्) = पशुओं को (पोषय) = पुष्ट कर, इनका संहार करनेवाली न हो।
Essence
यमिनी [संयत] बुद्धि हमारा पोषण करती है, हमारे व्यवहार को रसमय बनाती है तथा हमें मांसाहार से दूर रखती है।
Subject
पुष्टि+रस