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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 3/25/4

31 Sukta
6 Mantra
3/25/4
Devata- मित्रावरुणौ, कामबाणः Rishi- भृगुः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- कामबाण सूक्त
Mantra with Swara
शु॒चा वि॒द्धा व्यो॑षया॒ शुष्का॑स्या॒भि स॑र्प मा। मृ॒दुर्निम॑न्युः॒ केव॑ली प्रियवा॒दिन्यनु॑व्रता ॥

शु॒चा । वि॒ध्दा । विऽओ॑षया । शुष्क॑ऽआस्या । अ॒भि । स॒र्प॒ । मा॒ । मृ॒दु: । निऽम॑न्यु: । केव॑ली । प्रि॒य॒ऽवा॒दिनी॑ । अनु॑ऽव्रता॥२५.४॥

Mantra without Swara
शुचा विद्धा व्योषया शुष्कास्याभि सर्प मा। मृदुर्निमन्युः केवली प्रियवादिन्यनुव्रता ॥

शुचा । विध्दा । विऽओषया । शुष्कऽआस्या । अभि । सर्प । मा । मृदु: । निऽमन्यु: । केवली । प्रियऽवादिनी । अनुऽव्रता॥२५.४॥

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Meaning
१. (व्योषया) = विशेष दाह करनेवाले, (शुचा) = शोकवर्धक बाण से (विद्धा) = बिंधी हुई तू (शुष्कास्या) = शोक के कारण शुष्क मुखवाली (मा अभिसर्प) = मुझे प्रास हो। अब तू (मृदुः) = मृदुस्वभावा, (निमन्यु:) = क्रोधरहित [न्यक्कृतप्रणय-कलहा] (केवली) = असाधारणा-केवल मेरी कामनावाली, (प्रियवादिनी) = प्रिय शब्दों को बोलनेवाली व (अनुव्रता) = अनुकूल कर्मों को करनेवाली हो।
Essence
काम का बाण पति के प्रति पत्नी के प्रेम को बढ़ानेवाला हो। यह उसे अधिक मृदु व पतिव्रता बनाये।
Subject
मृदुः, निमन्युः, केवली