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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 3/22/6

31 Sukta
6 Mantra
3/22/6
Devata- बृहस्पतिः, विश्वेदेवाः, वर्चः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वर्चः प्राप्ति सुक्त
Mantra with Swara
ह॒स्ती मृ॒गाणां॑ सु॒षदा॑मति॒ष्ठावा॑न्ब॒भूव॒ हि। तस्य॒ भगे॑न॒ वर्च॑सा॒भि षि॑ञ्चामि॒ माम॒हम् ॥

ह॒स्ती । मृ॒गाणा॑म् । सु॒ऽसदा॑म् । अ॒ति॒स्थाऽवा॑न् । ब॒भूव॑ । हि । तस्य॑ । भगे॑न । वर्च॑सा । अ॒भि । सि॒ञ्चा॒मि॒ । माम् । अ॒हम् ॥२२.६॥

Mantra without Swara
हस्ती मृगाणां सुषदामतिष्ठावान्बभूव हि। तस्य भगेन वर्चसाभि षिञ्चामि मामहम् ॥

हस्ती । मृगाणाम् । सुऽसदाम् । अतिस्थाऽवान् । बभूव । हि । तस्य । भगेन । वर्चसा । अभि । सिञ्चामि । माम् । अहम् ॥२२.६॥

Meaning
१. (सुषदाम्) = [सुखेन सीदन्ति] अरण्य में स्वेच्छा से आसीन होनेवाले (मृगाणाम्) = हरिण आदि पशुओं में (हस्ती) = हाथी (हि) = निश्चय से (अतिष्ठावान् बभूव) = सबको लाँघकर स्थितिवाला सबसे आगे बढ़ा हुआ है। हाथी का बल सबसे अधिक है। २. (तस्य) = उस हाथी के (भगेन) = भजनीय सेवनीय (वर्चसा) = बल से (अहम) = मैं (माम्) = अपने को (अभिषिञ्चामि) = अभिषिक्त करता है। मैं भी बल के दृष्टिकोण से अपनों में आगे बढ़ने के लिए प्रयत्नशील होता हैं।
Essence
जैसे हाथी पशओं में सर्वाधिक बली है. इसीप्रकार मैं अपने सजातियों में सर्वाधिक बली बनने के लिए यत्नशील होता हूँ।
Subject
अतिष्ठावान्
Special
सुरक्षित शक्ति के द्वारा उत्तम सन्तानों का निर्माण करनेवाला यह साधक 'ब्रह्मा' [creater] बनता है। यह जिन सन्तानों को जन्म देता है, वे चन्द्रतुल्य सुन्दर मुखवाले होते हैं। अगले सूक्त का ऋषि यह ब्रह्मा है और देवता 'चन्द्रमाः' है -

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