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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 3/20/4

31 Sukta
10 Mantra
3/20/4
Devata- सोमः, अग्निः, आदित्यः, विष्णुः, ब्रह्मा, बृहस्पतिः Rishi- वसिष्ठः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- रयिसंवर्धन सूक्त
Mantra with Swara
सोमं॒ राजा॑न॒मव॑से॒ऽग्निं गी॒र्भिर्ह॑वामहे। आ॑दि॒त्यं विष्णुं॒ सूर्यं॑ ब्र॒ह्माणं॑ च॒ बृह॒स्पति॑म् ॥

सोम॑म् । राजा॑नम् । अव॑से । अ॒ग्निम् । गी॒:ऽभि: । ह॒वा॒म॒हे॒ । आ॒दि॒त्यम् । विष्णु॑म् । सूर्य॑म् । ब्र॒ह्माण॑म् । च॒ । बृह॒स्पति॑म् ॥२०.४॥

Mantra without Swara
सोमं राजानमवसेऽग्निं गीर्भिर्हवामहे। आदित्यं विष्णुं सूर्यं ब्रह्माणं च बृहस्पतिम् ॥

सोमम् । राजानम् । अवसे । अग्निम् । गी:ऽभि: । हवामहे । आदित्यम् । विष्णुम् । सूर्यम् । ब्रह्माणम् । च । बृहस्पतिम् ॥२०.४॥

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Meaning
१. इस जीवन-यात्रा में हम (अवसे) = अपनी रक्षा के लिए (सोमम्) = सोम को तथा (राजानम्) = अपने पर शासन करने की वृत्ति को अपने जीवन को व्यवस्थित [regulated] करने की वृत्ति को हवामहे-पुकारते हैं। सोम को पुकारने का भाव है "शरीर में शक्ति को रक्षित करना'। सब उन्नतियों का मूल यही है कि हम शरीर में सोम का रक्षण करें। इसके लिए जीवन को बड़ा व्यवस्थित करें । ब्रह्मचर्याश्रम का मूलसूत्र यही है। अब गृहस्थ में (गीर्भि:) = स्तुति-बाणियों के द्वारा (अग्रिम्) = अग्रणी प्रभु को पुकारते हैं 'निरन्तर आगे बढ़ना' इसी को जीवन का नियम बनाते हैं। इसी उद्देश्य से (आदित्यम्) = अन्धकार को छिन्न करनेवाले प्रकाशमय प्रभु को पुकारते हैं, स्वाध्याय के द्वारा जीवन को प्रकाशमय बनाये रखते है। ३. गृहस्थ से ऊपर उठकर वानप्रस्थ में (विष्णु सूर्यम्) = उस सर्वव्यापक, निरन्तर सरण करनेवाले प्रभु को पुकारते हुए हम हदय को विशाल तथा जीवन को क्रियामय बनाने के लिए यत्नशील होते हैं [विष्णु व्याप्ती, सृ गतौ]। ४. (च) = और अब संन्यस्त होकर हम (ब्रह्माणम्) = ब्रह्मा व (बृहस्पतिम्) = बृहस्पति को पुकारते हैं। ब्रह्मा वह है जिसमें सारा ब्रह्माण्ड प्रविष्ट है। मैं भी 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को जीवन का सूत्र बनाता हूँ और बृहस्पति की भाँति ज्ञान का प्रकाश करनेवाला होता हूँ।
Essence
हम सोमरक्षण करनेवाले व व्यवस्थित जीवनवाले बनें। हमारे जीवन का सूत्र आगे बढ़ना व स्वाध्याय द्वारा अन्धकार को छिन्न करना हो। हम विशाल हृदय व क्रियाशील हों और अन्त में सम्पूर्ण पृथिवी को अपने परिवार में प्रविष्ट कर सर्वत्र ज्ञान का प्रसार करें।
Subject
सोम से बृहस्पति तक