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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 3/18/1

31 Sukta
6 Mantra
3/18/1
Devata- वनस्पतिः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वनस्पति
Mantra with Swara
इ॒मां ख॑ना॒म्योष॑धिं वी॒रुधां॒ बल॑वत्तमाम्। यया॑ स॒पत्नीं॒ बाध॑ते॒ यया॑ संवि॒न्दते॒ पति॑म् ॥

इ॒माम् । ख॒ना॒मि॒ । ओष॑धिम् । वी॒रुधा॑म् । बल॑वत्ऽतमाम् । यया॑ । स॒ऽपत्नी॑म् । बाध॑ते । यया॑ । स॒म्ऽवि॒न्दते॑ । पति॑म् ॥१८.१॥

Mantra without Swara
इमां खनाम्योषधिं वीरुधां बलवत्तमाम्। यया सपत्नीं बाधते यया संविन्दते पतिम् ॥

इमाम् । खनामि । ओषधिम् । वीरुधाम् । बलवत्ऽतमाम् । यया । सऽपत्नीम् । बाधते । यया । सम्ऽविन्दते । पतिम् ॥१८.१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (इमाम्) = इस (ओषधिम्) = दोषों का दहन करनेवाली आत्मविद्या को (खनामि) = अत्यन्त श्रम के द्वारा आचार्य से प्रास करता हूँ। यह ओषधि (वीरुधाम्) = वीरुधा है-विशेषरूप से मेरा रोहण [विकास] करनेवाली है, (बलवत्तमाम्) = मुझे अतिशयित बल प्राप्त करानेवाली है, अथवा यह अन्य ओषधियों से बलवत्तमा है-सर्वाधिक बलवाली है। २. यह आत्मविद्या वह है (यया) = जिससे (सपत्नीम्) = इन्द्राणी की सपत्नीरूप भोगवृत्ति को (बाधते) = दूर रोका जाता है, (यया) = जिसके द्वारा (पतिं संविन्दते) = सर्वरक्षक पतिरूप प्रभु को प्राप्त किया जाता है। आत्मविद्या द्वारा भोगवृत्ति के विनष्ट होने पर हम परमात्मा को प्राप्त करते हैं।
Essence
हम आचार्य से आत्मविद्या को प्राप्त करके भोगवृत्ति को अपने से दूर करें तभी हम योगवृत्ति को अपनाकर प्रभुरूप पति को प्राप्त करेंगे।
Subject
आत्मविद्यारूप ओषधि