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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 3/14/1

31 Sukta
6 Mantra
3/14/1
Devata- गौः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गोष्ठ सूक्त
Mantra with Swara
सं वो॑ गो॒ष्ठेन॑ सु॒षदा॒ सं र॒य्या सं सुभू॑त्या। अह॑र्जातस्य॒ यन्नाम॒ तेना॑ वः॒ सं सृ॑जामसि ॥

सम् । व॒: । गो॒ऽस्थेन॑ । सु॒ऽसदा॑ । सम् । र॒य्या । सम् । सुऽभू॑त्या । अह॑:ऽजातस्य । यत् । नाम॑ । तेन॑ । व॒: । सम् । सृ॒जा॒म॒सि॒॥१४.१॥

Mantra without Swara
सं वो गोष्ठेन सुषदा सं रय्या सं सुभूत्या। अहर्जातस्य यन्नाम तेना वः सं सृजामसि ॥

सम् । व: । गोऽस्थेन । सुऽसदा । सम् । रय्या । सम् । सुऽभूत्या । अह:ऽजातस्य । यत् । नाम । तेन । व: । सम् । सृजामसि॥१४.१॥

Meaning
१. हे गौओ! हम (व:) = तुम्हें (सुषदा) = [सुखेन सीदन्ति अत्र] सुखपूर्वक निवासवाली (गोष्ठने) = गोशाला से (संसृजामसि) = संसष्ट करते हैं, (रय्या) = [रयि-water] उत्तम जलों से (सम्) = संसृष्ट करते हैं, (सुभूत्या) =  उत्पन्न होनेवाले उत्तम पदार्थों से (सम्) = संसृष्ट करते हैं। [सूयवसात.... पिब शुद्धमुदकम् । अथर्व० ७.७३.११] गौओं का निवास स्थान भी उत्तम [स्वच्छ] बनाते हैं, उत्तम घास [यवस्] खिलाते हैं, शुद्ध पानी पिलाते हैं। २. (अहर्जातस्य) = [अहनि अहनि जातं यस्मात्] प्रतिदिन जिसके द्वारा विकास होता है, उसका (यत् नाम) = जो नाम है (तेन) = उस नाम से (व: संसजामसि) = तुम्हें संसृष्ट करते हैं, अर्थात् इन गौ के दूध से प्रतिदिन सब शक्तियों का विकास होता है, अत: यह गौ भी 'अहर्जात' है।
Essence
गौओं का निवासस्थान भी साफ़-सुथरा हो, पानी भी शुद्ध हो, यवस् भी उत्तम हो। ऐसा होने पर ये गौएँ हमारे लिए अहर्जात' हो जाती हैं। इनके दुग्ध से प्रतिदिन सब शक्तियों का विकास होता है।
Subject
अहर्जात

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