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Atharvaveda - Mantra 7

Atharvaveda 3/12/7

31 Sukta
9 Mantra
3/12/7
Devata- शाला, वास्तोष्पतिः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- आर्ष्यनुष्टुप् Suktam- शालनिर्माण सूक्त
Mantra with Swara
एमां कु॑मा॒रस्तरु॑ण॒ आ व॒त्सो जग॑ता स॒ह। एमां प॑रि॒स्रुतः॑ कु॒म्भ आ द॒ध्नः क॒लशै॑रगुः ॥

आ । इ॒माम् । कु॒मा॒र: । तरु॑ण: । आ । व॒त्स: । जग॑ता । स॒ह । आ । इ॒माम् । प॒रि॒ऽस्रुत॑: । कु॒म्भ: । आ । द॒ध्न: । क॒लशै॑: । अ॒गु॒: ॥१२.७॥

Mantra without Swara
एमां कुमारस्तरुण आ वत्सो जगता सह। एमां परिस्रुतः कुम्भ आ दध्नः कलशैरगुः ॥

आ । इमाम् । कुमार: । तरुण: । आ । वत्स: । जगता । सह । आ । इमाम् । परिऽस्रुत: । कुम्भ: । आ । दध्न: । कलशै: । अगु: ॥१२.७॥

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Meaning
१. (इमाम्) = इस शाला में (तरुण:) = वासनाओं को तैर जानेवाला (कुमारः) = कुमार आ [गच्छतु] प्रास हो। (वत्सः) = बछड़ा जगता (सह) = गमनशील गौ आदि में साथ (आ) = [गच्छत]-प्राप्त हो। २. (इमाम्) = इस शाला को (परिस्तुतः) = प्रस्त्रवणशील शहद आदि का भरा हुआ (कुम्भ:) = घड़ा (आ) = प्राप्त  हो। ये घड़े (दध्नः कलशै:) = दही के कलशों-घड़ों के साथ (अगु:) = प्रास हों।
Essence
घर में तरुण कुमारों व बछड़ों का आगमन हो। यहाँ दधि-पटों के साथ शहद के कुम्भ प्राप्त हों।
Subject
दधि+मधु