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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 3/12/3

31 Sukta
9 Mantra
3/12/3
Devata- शाला, वास्तोष्पतिः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- बृहती Suktam- शालनिर्माण सूक्त
Mantra with Swara
ध॑रु॒ण्य॑सि शाले बृ॒हछ॑न्दाः॒ पूति॑धान्या। आ त्वा॑ व॒त्सो ग॑मे॒दा कु॑मा॒र आ धे॒नवः॑ सा॒यमा॒स्पन्द॑मानाः ॥

ध॒रु॒णी । अ॒सि॒ । शा॒ले॒ । बृ॒हत्ऽछ॑न्दा: । पूति॑ऽधान्या । आ । त्वा॒ । व॒त्स: । ग॒मे॒त् । आ । कु॒मा॒र: । आ । धे॒नव॑: । सा॒यम् । आ॒ऽस्पन्द॑माना: ॥१२.३॥

Mantra without Swara
धरुण्यसि शाले बृहछन्दाः पूतिधान्या। आ त्वा वत्सो गमेदा कुमार आ धेनवः सायमास्पन्दमानाः ॥

धरुणी । असि । शाले । बृहत्ऽछन्दा: । पूतिऽधान्या । आ । त्वा । वत्स: । गमेत् । आ । कुमार: । आ । धेनव: । सायम् । आऽस्पन्दमाना: ॥१२.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (शाले) = गृह ! तू (इह एव) = इस स्थान पर ही (ध्रुवा प्रतितिष्ठ) = स्थिर होकर स्थित हो। तू (अश्वावती) = प्रशस्त अश्वोंवाली, (गोमती) = प्रशस्त गौओंवाली व (सूनुसावती) = बालकों की प्रिय, सत्यवाणी से युक्त होकर हमारे (महते सौभाग्य) = महान् सौभाग्य के लिए (उत् श्रयस्व) = उद्गगत हो-उत्कृष्ट रूपवाली हो। २. (ऊर्जस्वती) = पौष्टिक अन्नवाली, (घृतवती) = घृत से युक्त तथा (पयस्वती) = बहुक्षीरा होती हुई हमारे सौभाग्य के लिए हो।
Essence
घर गौओं, घोड़ों व प्रिय सत्यवाणियों से युक्त हों। ये पौष्टिक अन्न, घृत व दुग्ध से सम्पन्न होते हुए हमारे महान् सौभाग्य के लिए हों।
Subject
'ऊर्जस्वती, पयस्वती, घृतवती' शाला