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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 3/10/1

31 Sukta
13 Mantra
3/10/1
Devata- धेनुः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- रायस्पोषप्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
प्र॑थ॒मा ह॒ व्यु॑वास॒ सा धे॒नुर॑भवद्य॒मे। सा नः॒ पय॑स्वती दुहा॒मुत्त॑रामुत्तरां॒ समा॑म् ॥

प्र॒थ॒मा । ह॒ । वि । उ॒वा॒स॒ । सा । धे॒नु: । अ॒भ॒व॒त् । य॒मे । सा । न॒: । पय॑स्वती । दु॒हा॒म् । उत्त॑राम्ऽउत्तराम् । समा॑म् ॥१०.१॥

Mantra without Swara
प्रथमा ह व्युवास सा धेनुरभवद्यमे। सा नः पयस्वती दुहामुत्तरामुत्तरां समाम् ॥

प्रथमा । ह । वि । उवास । सा । धेनु: । अभवत् । यमे । सा । न: । पयस्वती । दुहाम् । उत्तराम्ऽउत्तराम् । समाम् ॥१०.१॥

Meaning
१. दिन आठ अष्टकों में बटा है-आठ प्रहर का दिन होता है। उनमें उषा से प्रथम अष्टक प्रारम्भ होता है-यह एकाष्टका है-मुख्य [प्रथम] अष्टकबाली। यह (प्रथमा) = दिन के प्रारम्भ में आनेवाली उषा (ह) = निश्चय से (वि उवास) = अन्धकार को दूर [विवासित] करती है। (सा) = वह उषा यमे संयत जीवनवाले पुरुष के विषय में (धेनुः अभवत्) = ज्ञानदुग्ध देनेवाली होती है। २. (सा) = वह उषा (न:) = हमारे लिए (पयस्वती) = आप्यायन व वर्धन का कारण बनती हुई (दुहाम्) = हममें ज्ञानदुग्ध का प्रपूरण करे। (उत्तराम् उत्तराम् समाम्) = अगले और अगले वर्षों में यह हमारे ज्ञान को बढ़ानेवाली हो।
Essence
आठ प्रहर का यह दिन उषा से आरम्भ होता है। यही प्रथम व मुख्य प्रहर होता है, जो उषा से आरम्भ होता है। यह हमारे लिए धेनु के समान हो और हममें ज्ञानदुग्ध का उत्तरोत्तर अधिकाधिक पूरण करनेवाला हो। हमारा कर्तव्य स्वाध्याय हो।
Subject
उषारूप धेनु

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