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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 3/1/6

31 Sukta
6 Mantra
3/1/6
Devata- इन्द्रः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- शत्रु सेनासंमोहन सूक्त
Mantra with Swara
इन्द्रः॒ सेनां॑ मोहयतु म॒रुतो॑ घ्न॒न्त्वोज॑सा। चक्षूं॑ष्य॒ग्निरा द॑त्तां॒ पुन॑रेतु॒ परा॑जिता ॥

इन्द्र॑: । सेना॑म् । मो॒ह॒य॒तु॒ । म॒रुत॑: । घ्न॒न्तु॒ । ओज॑सा । चक्षूं॑षि । अ॒ग्नि: । आ । द॒त्ता॒म् । पुन॑: । ए॒तु॒ । परा॑ऽजिता ॥१.६॥

Mantra without Swara
इन्द्रः सेनां मोहयतु मरुतो घ्नन्त्वोजसा। चक्षूंष्यग्निरा दत्तां पुनरेतु पराजिता ॥

इन्द्र: । सेनाम् । मोहयतु । मरुत: । घ्नन्तु । ओजसा । चक्षूंषि । अग्नि: । आ । दत्ताम् । पुन: । एतु । पराऽजिता ॥१.६॥

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Meaning
१. (इन्द्रः) = सेनापति (सेनाम्) = शत्र-सेना को (मोहयत) = मोह में डाल दे-उनके चित्त अव्यवस्थित हो जाएँ, प्रबल आक्रमण से घबराकर उन्हें कर्तव्याकर्तव्य की समझ ही न रहे। (मरुतः) = सैनिक (ओजसा) = पूर्ण आजस्विता के साथ, शूरता के साथ घ्नन्तु आक्रमण करके शत्रुओं को मारनेवाले हों। २. (अग्निः) = आग्रेयास्त्रों का प्रयोग (चक्षूंषी आदत्ताम्) = शत्रुओं की आँखों को छीन ले, अर्थात् शत्रुओं की आँखें चंधिया जाएँ। इसप्रकार वह शत्रुसेना (पराजिता) = पराजित हुई-हुई (पुनः एतु) = फिर वापस भाग जानेवाली हो।
Essence
इन्द्र, मरुत व अग्नि-सेनापति, सैनिक व अग्नेयास्त्रों का प्रयोग-ये सब शत्रुओं को परजित करके भगा दें।
Subject
इन्द्र, मरुत् व अग्नि
Special
सूक्त का विषय 'शत्रुसेना के विनाश के द्वारा राष्ट्र का रक्षण' है। अगले सूक्त का विषय भी यही है । ऋषि, देवता भी वही है। प्रथम मन्त्र भी एक-आध शब्द के परिवर्तन के साथ वही है।