Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 2/9/1

36 Sukta
5 Mantra
2/9/1
Devata- वनस्पतिः, यक्ष्मनाशनम् Rishi- भृग्वङ्गिराः Chhanda- विराट्प्रस्तारपङ्क्तिः Suktam- दीर्घायु प्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
दश॑वृक्ष मु॒ञ्चेमं रक्ष॑सो॒ ग्राह्या॒ अधि॒ यैनं॑ ज॒ग्राह॒ पर्व॑सु। अथो॑ एनं वनस्पते जी॒वानां॑ लो॒कमुन्न॑य ॥

दश॑ऽवृक्ष । मु॒ञ्च । इ॒मम् । रक्ष॑स: । ग्राह्या॑: । अधि॑ । या । ए॒न॒म्। ज॒ग्राह॑ । पर्व॑ऽसु । अथो॒ इति॑ । ए॒न॒म् । व॒न॒स्प॒ते॒ । जी॒वाना॑म् । लो॒कम् । उत् । न॒य॒ ॥९.१॥

Mantra without Swara
दशवृक्ष मुञ्चेमं रक्षसो ग्राह्या अधि यैनं जग्राह पर्वसु। अथो एनं वनस्पते जीवानां लोकमुन्नय ॥

दशऽवृक्ष । मुञ्च । इमम् । रक्षस: । ग्राह्या: । अधि । या । एनम्। जग्राह । पर्वऽसु । अथो इति । एनम् । वनस्पते । जीवानाम् । लोकम् । उत् । नय ॥९.१॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (दशवृक्ष) = दशवृक्षों के मेल से बनाये जानेवाले 'दशमूल' नामक औषध ! (इमम्) = इस पुरुष को (रक्षस:) = इस अत्यन्त राक्षसी-सब रमणों-आनन्दों का क्षय करनेवाली-(ग्राह्या:) = अङ्गों को जकड़ लेनेवाली ग्राही [गठिया] नामक बीमारी से (अधिमुञ्च) = मुक्त करो, (या) = जो बीमारी (एनम्) = इसे (पर्वसु जग्राह) = पों में जोड़ों में पकड़े हुए हैं। २. (अथ उ) = और अब इसे रोगमुक्त करके हे (वनस्पते) = शरीर का रक्षण करनेवाली औषध! तू (एनम्) = इसे (जीवानां लोकम्) = जीवित पुरुषों के लोक में (उन्नय) = उत्कर्षेण प्राप्त करा। रोगग्रस्त होकर यह इधर-उधर जाने में असमर्थ हो गया था। इसे रोगमुक्त करके समाज में फिर से ठीक विचरण करनेवाला बना दो।
Essence
दशवृक्षों के मूल से उत्पन्न 'दशमूल' औषध संधिवात को दूर करके हमें समाज में आने-जाने के योग्य बना दे।
Subject
सन्धिवात-चिकित्सा