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Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 2/6/5

36 Sukta
5 Mantra
2/6/5
Devata- अग्निः Rishi- शौनकः Chhanda- विराट्प्रस्तारपङ्क्तिः Suktam- सपत्नहाग्नि
Mantra with Swara
अति॒ निहो॒ अति॒ सृधो ऽत्यचि॑त्ती॒रति॒ द्विषः॑। विश्वा॒ ह्य॑ग्ने दुरि॒ता तर॒ त्वमथा॒स्मभ्यं॑ स॒हवी॑रं र॒यिं दाः॑ ॥

अति॑ । निह॑: । अति॑ । सृध॑: । अति॑ । अचि॑त्ती: । अति॑ । द्विष॑: । विश्वा॑ । हि । अ॒ग्ने॒ । दु॒:ऽइ॒ता । त॒र॒ । त्वम् । अथ॑ । अ॒स्मभ्य॑म् । स॒हऽवी॑रम् । र॒यिम् । दा॒: ॥६.५॥

Mantra without Swara
अति निहो अति सृधो ऽत्यचित्तीरति द्विषः। विश्वा ह्यग्ने दुरिता तर त्वमथास्मभ्यं सहवीरं रयिं दाः ॥

अति । निह: । अति । सृध: । अति । अचित्ती: । अति । द्विष: । विश्वा । हि । अग्ने । दु:ऽइता । तर । त्वम् । अथ । अस्मभ्यम् । सहऽवीरम् । रयिम् । दा: ॥६.५॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (अग्ने) = राजन्! तू राष्ट्र में (निहः) = [निहन्ति इति] औरों का वध करनेवालों को (अति) = [तर]-लाँधनेवाला हो। उन्हें उचित दण्ड आदि देकर राष्ट्र में इन वध के अपराधों को समाप्त करनेवाला हो । (स्वधः) = [कुत्सित कर्मणि] अन्य कुत्सित कर्म करनेवालों को तू (अति) = [तर]-समाप्त कर । (अचित्ती:) = अज्ञानियों को (अति) = [तर]-ज्ञान-प्रसार के द्वारा समाप्त करनेवाला हो। (द्विषः) = सब द्वेष करनेवालों को (अति) = [तर]-तू दूर कर। ठीक बात तो यह है कि (हि) = निश्चय से विश्वा दुरिता (तर) = सब बुराइयों को तू राष्ट्र से दूर करनेवाला हो। २. इसप्रकार राष्ट्र के अपराधों व अशुभ वृत्तियों को दूर करके (त्वम्) = तू (अथ) = अब (अस्मभ्यम्) = हमारे लिए (सहवीरम) = वीरता के २ साथ (रयिम्) = धन (दा:) = दे। राजा का यह भी कर्तव्य है कि वह राष्ट्र में ऐसी व्यवस्था करे कि उसके राष्ट्र में सब वीर तथा सम्पन्न हो। निर्बलता व निर्धनता को दूर करना भी राजा का आवश्यक कर्तव्य है।

 
Essence
राजा राष्ट्र से बुराइयों का उन्मूलन करके सबको सबल व सम्पन्न बनाए।
Subject
सबलता व सम्पन्नता
Special
सूक्त में कहा है-राजा राष्ट्र में सर्वत्र ज्ञान का प्रसार करे [१]। वह राष्ट्र के सौभाग्य का वर्धन करनेवाला हो [२]। राष्ट्ररक्षण में सदा जागरित रहे [३]। राष्ट्र को शत्रुओं से आक्रान्त न होने दे [४]। राष्ट्र में सभी को सबल व सम्पन्न बनाए [५]। अगले सूक्त में द्वेष के कारणभूत आक्रोश को दूर करने का सन्देश है। सब आक्रोशों से ऊपर उठनेवाला यह मन पूर्ण प्रभुत्ववाला 'अथर्वा' [डाँवाडोल न होनेवाला] बनता है और प्रार्थना करता है कि -