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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 2/26/4

36 Sukta
5 Mantra
2/26/4
Devata- पशुसमूहः Rishi- सविता Chhanda- भुरिगअनुष्टुप् Suktam- पशुसंवर्धन सूक्त
Mantra with Swara
सं सि॑ञ्चामि॒ गवां॑ क्षी॒रं समाज्ये॑न॒ बलं॒ रस॑म्। संसि॑क्ता अ॒स्माकं॑ वी॒रा ध्रु॒वा गावो॒ मयि॒ गोप॑तौ ॥

सम् । सि॒ञ्चा॒मि॒ । गवा॑म् । क्षी॒रम् । सम् । आज्ये॑न । बल॑म् । रस॑म् । सम्ऽसि॑क्ता: । अ॒स्माक॑म् । वी॒रा: । ध्रु॒वा: । गाव॑: । मयि॑ । गोऽप॑तौ ॥२६.४॥

Mantra without Swara
सं सिञ्चामि गवां क्षीरं समाज्येन बलं रसम्। संसिक्ता अस्माकं वीरा ध्रुवा गावो मयि गोपतौ ॥

सम् । सिञ्चामि । गवाम् । क्षीरम् । सम् । आज्येन । बलम् । रसम् । सम्ऽसिक्ता: । अस्माकम् । वीरा: । ध्रुवा: । गाव: । मयि । गोऽपतौ ॥२६.४॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. मैं (गवां क्षीरम्) = गौओं के दूध को (संसिचामि) = सम्यक् सिक्त करता हूँ-रजकर गोदुग्ध का सेवन करता हैं। (आज्येन) = घृत के द्वारा (बलम) = शरीर में बल को तथा (रसम) = वाणी में रस को (सम्) = सम्यक् सिक्त करता हूँ। गोदुग्ध के यथेष्ट पान से शरीर व मन स्वस्थ रहते हैं। गोघृत शरीर को बलवान् और वाणी को रसीला बनानेवाला है। २. (अस्माकं वीरा:) = हमारे सन्तान भी (संसिक्ताः) = गोदुग्ध व घृत से सम्यक् सिक्त होते हैं, इसलिए (मयि गोपतौ) = मुझ गोरक्षक में (गावः) = गौएँ (ध्रुवा:) = ध्रुवता से रहती हैं। ऐसा कभी नहीं होता कि में गौ न रक्खें। मेरा घर सदा गौवाला घर बना रहता है। घर में गौ होने पर सब गोदुग्ध का यथेष्ट प्रयोग कर पाते हैं।
Essence
घर पर गौ को नियम से रखना ही चाहिए, ताकि सब यथेष्ट दूध पी सकें।
Subject
घर पर गौ का ध्रुव निवास