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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 2/18/4

36 Sukta
5 Mantra
2/18/4
Devata- अग्निः Rishi- चातनः Chhanda- द्विपदा साम्नीबृहती Suktam- शत्रुनाशन सूक्त
Mantra with Swara
पि॑शाच॒क्षय॑णमसि पिशाच॒चात॑नं मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥

पि॒शा॒च॒ऽक्षय॑णम् । अ॒सि॒ । पि॒शा॒च॒ऽचात॑नम् । मे॒ । दा॒: । स्वाहा॑ ॥१८.४॥

Mantra without Swara
पिशाचक्षयणमसि पिशाचचातनं मे दाः स्वाहा ॥

पिशाचऽक्षयणम् । असि । पिशाचऽचातनम् । मे । दा: । स्वाहा ॥१८.४॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे प्रभो! आप (पिशाचक्षयणम् असि) = [पिशितमश्नन्ति इति] मांसभक्षण करनेवालों का विनाश करते हैं। (मे) = मरे लिए आप (पिशाचचातनम्) = इस मांसभक्षण की वृत्ति के विनाश को

(दा:) = प्राप्त कराइए। २. मैं कभी भी पर-मांस से स्व-मांस को बढ़ाने की भावनावाला न हो। (स्वाहा) = [सु आह] कितने सुन्दर ये वचन हैं। मेरी भावना सदा ऐसी बनी रहे।
Essence
मैं मांस-भक्षण से बचूँ।
Subject
मांसभक्षण निवृत्ति