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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 2/17/6

36 Sukta
7 Mantra
2/17/6
Devata- प्राणः, अपानः, आयुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- एदपदासुरीत्रिष्टुप् Suktam- बल प्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
चक्षु॑रसि॒ चक्षु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥

चक्षु॑: । अ॒सि॒ । चक्षु॑: । मे॒ । दा॒: । स्वाहा॑ ॥१७.६॥

Mantra without Swara
चक्षुरसि चक्षुर्मे दाः स्वाहा ॥

चक्षु: । असि । चक्षु: । मे । दा: । स्वाहा ॥१७.६॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. गतमन्त्र में वर्णित श्रोत्र के साथ चक्षु भी ज्ञान-प्राति के प्रमुख साधनों में है, अतः उपासक प्रार्थना करता है कि प्रभो! आप (चक्षुः असि) = सम्पूर्ण दृष्टिशक्ति के स्रोत हैं। (मे) = मेरे  लिए (चक्षुः दाः) = दृष्टिशक्ति प्रदान कीजिए। (स्वाहा) = मैं सदा इस शुभ प्रार्थना को करनेवाला बनें। २. चक्षु से प्रकृति की शोभा को देखते हुए हम प्रभु की महिमा को देखनेवाले बनते हैं, अत: वही जीवन वाञ्छनीय है जिसमें दृष्टिशक्ति ठीक बनी रहे।
Essence
उत्तम दृष्टिशक्ति को पाकर मैं प्रकृति में सर्वत्र प्रभु को विभूतियों का दर्शन करनेवाला बनू।
Subject
चक्षु: