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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 2/17/4

36 Sukta
7 Mantra
2/17/4
Devata- प्राणः, अपानः, आयुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- एदपदासुरीत्रिष्टुप् Suktam- बल प्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
आयु॑र॒स्यायु॑र्मे दाः॒ स्वाहा॑ ॥

आयु॑: । अ॒सि॒ । आयु॑: । मे॒ । दा॒: । स्वाहा॑ ॥१७.४॥

Mantra without Swara
आयुरस्यायुर्मे दाः स्वाहा ॥

आयु: । असि । आयु: । मे । दा: । स्वाहा ॥१७.४॥

Meaning
१. हे प्रभो! आप (आयुः असि) = जीवन-ही-जीवन हो। (मे) = मेरे लिए (आयुः दाः) = जीवन दीजिए। २. जब तक 'मानस बल' बना रहता है, तब तक जीवन भी बना रहता है, अत: बल के बाद आयुष्य की प्रार्थना है। इस बल के न रहने पर आयुष्य भी समाप्त हो जाता है, इसलिए हम बल को प्राप्त करके आयुष्य की प्रार्थना करें। (स्वाहा) = हमारी वाणी इस शुभ प्रार्थना को ही करनेवाली हो।
Essence
प्रकृति की ओर झुकाव आयु को क्षीण करता है। मैं प्रभुभक्त बनकर दीर्घजीवन प्राप्त करूँ।
Subject
आयुः

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