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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 2/17/3

36 Sukta
7 Mantra
2/17/3
Devata- प्राणः, अपानः, आयुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- एदपदासुरीत्रिष्टुप् Suktam- बल प्राप्ति सूक्त
Mantra with Swara
बल॑मसि॒ बलं॑ दाः॒ स्वाहा॑ ॥

बल॑म् । अ॒सि॒ । बल॑म् । मे॒ । दा॒: । स्वाहा॑ ॥१७.३॥

Mantra without Swara
बलमसि बलं दाः स्वाहा ॥

बलम् । असि । बलम् । मे । दा: । स्वाहा ॥१७.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. प्रभो ! (बलम् असि) = आप बलस्वरूप हैं। (मे) = मेरे लिए (बलं दा:) = बल प्रदान कीजिए। (स्वाहा) = मेरी वाणी सदा यही शुभ प्रार्थना करनेवाली हो। २. सहनशक्ति मन को बलवान् बनाती है। सहन के अभाव में मनुष्य की शक्ति दग्ध हो जाती है। मनुष्य इस मानस बल के अनुपात में ही रोगादि शत्रुओं पर विजय पानेवाला होता है, अत: हम प्रभु को 'बल' के रूप में स्मरण करें और उससे बल की याचना करें।
Essence
प्रभु 'बल' हैं। मैं भी बलवाला बनें।
Subject
बल