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Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 2/16/5

36 Sukta
5 Mantra
2/16/5
Devata- प्राणः, अपानः, आयुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- द्विपदासुरी गायत्री Suktam- सुरक्षा सूक्त
Mantra with Swara
विश्व॑म्भर॒ विश्वे॑न मा॒ भर॑सा पाहि॒ स्वाहा॑ ॥

विश्व॑म् ऽभर । विश्वे॑न । मा॒ । भर॑सा । पा॒हि॒ । स्वाहा॑ ॥१६.५॥

Mantra without Swara
विश्वम्भर विश्वेन मा भरसा पाहि स्वाहा ॥

विश्वम् ऽभर । विश्वेन । मा । भरसा । पाहि । स्वाहा ॥१६.५॥

Meaning
१.हे (विश्वम्भर) = सारे विश्व का भरण-पोषण करनेवाले प्रभो! (मा) = मुझे (विश्वेन भरसा) = सम्पूर्ण पोषणशक्ति के द्वारा (पाहि) = रक्षित कीजिए। (स्वाहा) = यह मेरी उत्तम वाणी हो। इन उत्तम शब्दों में याचना करता हुआ मैं अङ्ग-प्रत्यङ्ग की पोषण शक्तिवाला होऊँ। २. प्रभु को 'विश्वम्भर' नाम से स्मरण करता हुआ मैं शरीर, मन व बुद्धि सभी का ठीक से भरण-पोषण करनेवाला बनें।
Essence
प्रभु विश्वम्भर हैं। मैं भी विश्वम्भर बनूँ। अपनी सब शक्तियों का पोषण करता हुआ सभी का भरण करनेवाला बनें।
Subject
पोषणशक्ति
Special
सूक्त में उत्तम जीवन का चित्रण इस रूप में हुआ है कि जिसमें रोग नहीं, दर्शनशक्ति व श्रवणशक्ति ठीक है, मन दिव्य गुणों से युक्त है और सब अङ्ग-प्रत्यङ्ग शक्तिसम्पन्न हैं, वही उत्तम जीवन है। ऐसे जीवन के लिए ही अगले सूक्त में प्रार्थना है -

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