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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 2/16/3

36 Sukta
5 Mantra
2/16/3
Devata- प्राणः, अपानः, आयुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- एदपदासुरीत्रिष्टुप् Suktam- सुरक्षा सूक्त
Mantra with Swara
सूर्य॒ चक्षु॑षा मा पाहि॒ स्वाहा॑ ॥

सूर्य॑ । चक्षु॑षा । मा॒ । पा॒हि॒ । स्वाहा॑ ॥१६.३॥

Mantra without Swara
सूर्य चक्षुषा मा पाहि स्वाहा ॥

सूर्य । चक्षुषा । मा । पाहि । स्वाहा ॥१६.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (सूर्य) = हे सूर्य! (चक्षुषा) = दर्शनशक्ति के द्वारा (मा पाहि) = तू मेरा रक्षण कर। (सूर्यश्चक्षुर्भूत्वा अक्षिणी प्राविशत्) = सूर्य चक्षु बनकर मेरी आँखों में निवास करनेवाला हो। इस दर्शनशक्ति से प्रकृति में प्रभु-महिमा को देखता हुआ मैं आत्मज्ञान को प्राप्त करनेवाला बनूं। २. (स्वाहा) = मेरी वाणी इस बात को बारम्बार कहनेवाली हो। इसका जप करता हुआ मैं आत्मप्ररेणा प्राप्त करूँ और दर्शनशक्ति को बढ़ाकर अशुभ मार्ग से बचकर शुभ मार्ग पर चलूँ। यही रक्षा का मार्ग है।

 
Essence
मैं सूर्य की भाँति व्यापक दृष्टिवाला बनूं।
Subject
दर्शनशक्ति