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Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 2/14/5

36 Sukta
6 Mantra
2/14/5
Devata- शालाग्निः Rishi- चातनः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- दस्युनाशन सूक्त
Mantra with Swara
यदि॒ स्थ क्षे॑त्रि॒याणां॒ यदि॑ वा॒ पुरु॑षेषिताः। यदि॒ स्थ दस्यु॑भ्यो जा॒ता नश्य॑ते॒तः स॒दान्वाः॑ ॥

यदि॑ । स्थ । क्षे॒त्रि॒याणा॑म् । यदि॑ । वा॒ । पुरु॑षऽइषिता: । यदि॑ । स्थ । दस्यु॑ऽभ्य: । जा॒ता: । नश्य॑त । इ॒त: । स॒दान्वा॑: ॥१४.५॥

Mantra without Swara
यदि स्थ क्षेत्रियाणां यदि वा पुरुषेषिताः। यदि स्थ दस्युभ्यो जाता नश्यतेतः सदान्वाः ॥

यदि । स्थ । क्षेत्रियाणाम् । यदि । वा । पुरुषऽइषिता: । यदि । स्थ । दस्युऽभ्य: । जाता: । नश्यत । इत: । सदान्वा: ॥१४.५॥

Meaning
१. हे (सदान्वाः) = [सदा नोनूयमानाः] सदा अपशब्द बोलनेवाली स्त्रियो! (इतः) = यहाँ से हमारे घर से (नश्यत:) = तुम अदृष्ट हो जाओ। (यदि) = चाहे तुम (क्षेत्रियाणाम् स्थ) = क्षेत्रिय रोगों की निदानभूत हो, (यदि वा) = अथवा पुरुष (इषिता:) = किसी अन्य पुरुष से व्यर्थ की चुगलियों से उत्तेजित [excited, animated] कर दी गई हो। अथवा (यदि) = यदि तुम (दस्युभ्यः जाता:) = नाशक वृत्तियों से ऐसी बन गई हो। २. स्त्रियों में आक्रोश वृत्ति पैदा होने के तीन कारण हैं-[क] कोई क्षेत्रिय रोग, [ख] किसी पुरुष से भड़काया जाना, [ग] कोई बड़ी हानि हो जाना [दस्यु]। किसी भी कारण से यह दोष उत्पन्न हो जाए तो उस स्त्री का दूर होना ही ठीक है।
Essence
आक्रोशकारिणी स्त्री का घर से दूर होना ही ठीक है।
Subject
आक्रोशकारिणी का विनाश

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