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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 19/9/2

72 Sukta
14 Mantra
19/9/2
Devata- शान्तिः, मन्त्रोक्ताः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- शान्ति सूक्त
Mantra with Swara
शा॒न्तानि॑ पूर्वरू॒पाणि॑ शा॒न्तं नो॑ अस्तु कृताकृ॒तम्। शा॒न्तं भू॒तं च॒ भव्यं॑ च॒ सर्व॑मे॒व शम॑स्तु नः ॥

शा॒न्तानि॑। पू॒र्व॒ऽरू॒पाणि॑। शा॒न्तम्। नः॒। अ॒स्तु॒। कृ॒त॒ऽअ॒कृ॒तम्। शा॒न्तम्। भू॒तम्। च॒। भव्य॑म्। च॒। सर्व॑म्। ए॒व। शम्। अ॒स्तु॒। नः॒ ॥९.२॥

Mantra without Swara
शान्तानि पूर्वरूपाणि शान्तं नो अस्तु कृताकृतम्। शान्तं भूतं च भव्यं च सर्वमेव शमस्तु नः ॥

शान्तानि। पूर्वऽरूपाणि। शान्तम्। नः। अस्तु। कृतऽअकृतम्। शान्तम्। भूतम्। च। भव्यम्। च। सर्वम्। एव। शम्। अस्तु। नः ॥९.२॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (पूर्वरूपाणि) = पहले-पहले प्रादुर्भूत हुए रोगों के पूर्वरूप हमारे लिए (शान्तानि) = शान्त हों-कष्टजनक न हों। रोग प्रारम्भ में ही समाप्त हो जाए, वह बढ़कर हमारे कष्ट का कारण न बने । (कृताकृतम्) = [कृतं च अकृतं च] कुछ किया गया और कुछ न किया गया, अर्थात् अधूरा काम (न:) = हमारे लिए (शान्तम् अस्तु) = शान्त हो जाए, अर्थात् हम कार्यों को अधूरेपन से न करें। २. इसप्रकार (भूतं च भव्यम् च) = विगत काल व आनेवाला काल-दोनों ही हमारे लिए (शान्तम्) = शान्ति देनेवाले हों। वस्तुतः (सर्वम् एव) = सब-कुछ ही (नः शम् अस्तु) = हमारे लिए शान्तिकर हो।
Essence
हम रोगों को प्रारम्भ में ही शान्त करनेवाले बनें। सब-कुछ-सारा वातावरण और पदार्थ हमें शान्ति देनेवाले हों।
Subject
'भूत व भव्य' की अनुकूलता