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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 19/3/4

72 Sukta
4 Mantra
19/3/4
Devata- अग्निः Rishi- अथर्वाङ्गिराः Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- जातवेदा सूक्त
Mantra with Swara
श्रुत्क॑र्णाय क॒वये॒ वेद्या॑य॒ वचो॑भिर्वा॒कैरुप॑ यामि रा॒तिम्। यतो॑ भ॒यमभ॑यं॒ तन्नो॑ अ॒स्त्वव॑ दे॒वानां॑ यज॒ हेडो॑ अग्ने ॥

श्रुत्ऽक॑र्णाय। क॒वये॑। वेद्या॑य। वचः॑ऽभिः। वा॒कैः। उप॑। या॒मि॒। रा॒तिम्। यतः॑। भ॒यम्। अभ॑यम्। तत्। नः॒। अ॒स्तु॒। अव॑। दे॒वाना॑म्। य॒ज॒। हेडः॑। अ॒ग्ने॒ ॥३.४॥

Mantra without Swara
श्रुत्कर्णाय कवये वेद्याय वचोभिर्वाकैरुप यामि रातिम्। यतो भयमभयं तन्नो अस्त्वव देवानां यज हेडो अग्ने ॥

श्रुत्ऽकर्णाय। कवये। वेद्याय। वचःऽभिः। वाकैः। उप। यामि। रातिम्। यतः। भयम्। अभयम्। तत्। नः। अस्तु। अव। देवानाम्। यज। हेडः। अग्ने ॥३.४॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (अग्ने) = अग्रणी प्रभो! (श्रत्कर्णाय) = जिसके कान हमारी प्रार्थना को सदा सुनते हैं, अथवा [श्रुत् ज्ञान से कर्ण कृ विक्षेपे] ज्ञान के द्वारा वासनाओं को विकीर्ण करनेवाले, (कवये) = सर्वज्ञ, (वेद्याय) = अन्तिम जानने योग्य (तत्) = उन आप [प्रभु] के लिए (वाकै:) = सम्यक् उच्चरित (वचोभि:) = वचनों से (रातिम् उपयामि) = अभिलक्षित फलदान की याचना करता है। २. यही याचना करता हैं कि हे अग्ने! (यत: भयम्) = जहाँ से भी भय है, (तत्) = वह सब भय का कारण (न:) = हमारे लिए (अभयम् अस्तु) = भय का कारण न रहे। हे प्रभो! आप सब (देवानाम्) = सूर्य, विद्युत, अग्नि आदि देवों के तथा विद्वानों के (हेड:) = हमारे प्रति क्रोध को (अवयज) = दूर कीजिए। इनका क्रोध हमें प्राप्त न हो। इनकी अनुकूलता होकर हमें स्वास्थ्य की शक्ति व ज्ञान प्राप्त हो।
Essence
प्रभु से हमारी यही याचना है कि वे सब देवों के क्रोध को हमसे दूर करके हमें निर्भय करें। देवानुग्रह हमें शक्ति व ज्ञान प्राप्त कराए।
Subject
'महान् अग्नि' प्रभु से प्रार्थना