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Atharvaveda - Mantra 29

Atharvaveda 19/23/29

72 Sukta
30 Mantra
19/23/29
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- दैवी पङ्क्तिः Suktam- अथर्वाण सूक्त
Mantra with Swara
ब्र॒ह्मणे॒ स्वाहा॑ ॥

ब्र॒ह्मणे॑। स्वाहा॑ ॥२३.२९॥

Mantra without Swara
ब्रह्मणे स्वाहा ॥

ब्रह्मणे। स्वाहा ॥२३.२९॥

Meaning
१. (विषासहौ) = वेदज्ञान द्वारा सब शत्रुओं का पराभव करनेवाली इस गृहिणी के लिए हम (स्वाहा) = प्रशंसात्मक शब्द कहते हैं। इससे सब गृहिणियों को 'विषासहि' बनने की प्रेरणा प्राप्त होती है। २. (मंगलिकेभ्यः स्वाहा) = वेदज्ञान द्वारा सदा यज्ञ आदि मंगल कार्यों को करनेवाले पुरुषों के लिए हम प्रशंसात्मक शब्द कहते हैं। इससे सभी को इन मंगल कार्यों को करने की प्रवृत्ति प्राप्त होती है। ३. अन्ततः हम (ब्रह्मणे) = इन चारों वेदों का ज्ञान प्राप्त करनेवाले सर्वोत्तम सात्त्विक पुरुष के लिए शुभ शब्द कहते हैं और स्वयं ऐसा बनने का ही अपना लक्ष्य बनाते हैं।
Essence
वेदज्ञान से हम शत्रुओं का मर्षण करनेवाले, मंगल कार्यों को करनेवाले व सर्वोत्तम सात्त्विक स्थिति की ओर बढ़नेवाले बनते हैं।
Subject
विषासहि-मंगलिक-ब्रह्मा

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