Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 25

Atharvaveda 19/23/25

72 Sukta
30 Mantra
19/23/25
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- दैवी पङ्क्तिः Suktam- अथर्वाण सूक्त
Mantra with Swara
व्रा॒त्याभ्यां॒ स्वाहा॑ ॥

व्रा॒त्याभ्या॑म्। स्वाहा॑॥२३.२५॥

Mantra without Swara
व्रात्याभ्यां स्वाहा ॥

व्रात्याभ्याम्। स्वाहा॥२३.२५॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. [रोहयति इति] (रोहितेभ्य:) = हमारा उत्थान करनेवाले इन वेदमन्त्रों के लिए (स्वाहा) = मैं अपना अर्पण करता हूँ। २. (सूर्याभ्यां स्वाहा) = वेद से प्रेरणा प्राप्त करके सूर्य की भाँति निरन्तर गतिशील [सरति] पति-पत्नी के लिए हम शुभ शब्द कहते हैं। उनका प्रशंसन करते हैं। हम भी उनसे अपना जीवन उन-जैसा बनाने की प्रेरणा लेते हैं। ३. (वात्याभ्याम्) = व्रतमय जीवनवाले पति-पत्नी के लिए हम (स्वाहा) = प्रशंसात्मक शब्द कहते हैं। हम भी उनकी भौति व्रती जीवनवाले होते हैं। ४. (प्राजापत्याभ्याम्) = सन्तानों का उत्तम रक्षण करनेवाले इन पति-पत्नी के लिए (स्वाहा) = हम प्रशंसात्मक शब्द कहते हैं और उनसे स्वयं भी सन्तानों के सम्यक् रक्षण की प्रेरणा लेते हैं।
Essence
उन्नति के साधनभूत वेद-मन्त्रों का अध्ययन करते हुए हम निरन्तर गतिशील [सूर्य] व्रतमय जीवनवाले [ब्रात्य] व सन्तानों का सम्यक् रक्षण करनेवाले [प्राजापत्य] बनते हैं।
Subject
सूर्य-वात्य-प्राजापत्य