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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 19/19/9

72 Sukta
11 Mantra
19/19/9
Devata- चन्द्रमाः, मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- भुरिग्बृहती Suktam- शर्म सूक्त
Mantra with Swara
इन्द्रो॑ वी॒र्ये॒णोद॑क्राम॒त्तां पुरं॒ प्र ण॑यामि वः। तामा वि॑शत॒ तां प्र वि॑शत॒ सा वः॒ शर्म॑ च॒ वर्म॑ च यच्छतु ॥

इन्द्रः॑। वी॒र्ये᳡ण। उत्। अ॒क्रा॒म॒त्। ताम्। पुर॑म्। प्र। न॒या॒मि॒। वः॒। ताम्। आ। वि॒श॒त॒। ताम्। प्र। वि॒श॒त॒। सा। वः॒। शर्म॑। च॒। वर्म॑। च॒। य॒च्छ॒तु॒ ॥१९.९॥

Mantra without Swara
इन्द्रो वीर्येणोदक्रामत्तां पुरं प्र णयामि वः। तामा विशत तां प्र विशत सा वः शर्म च वर्म च यच्छतु ॥

इन्द्रः। वीर्येण। उत्। अक्रामत्। ताम्। पुरम्। प्र। नयामि। वः। ताम्। आ। विशत। ताम्। प्र। विशत। सा। वः। शर्म। च। वर्म। च। यच्छतु ॥१९.९॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (इन्द्रः) = एक जितेन्द्रिय पुरुष, जितेन्द्रियता के द्वारा वीर्यरक्षण करता हुआ, (वीर्येण) = इस सुरक्षित वीर्य से (उदक्रामत्) = उन्नत होता है। २. इन वीर्यरक्षक, जितेन्द्रिय पुरुषों को मैं ब्रह्मनगरी में प्राप्त कराता हूँ। शेष पूर्ववत्।।
Essence
एक जितेन्द्रिय पुरुष वीर्यरक्षण के द्वारा ब्रह्म की प्राप्ति का पात्र बनता है। सुरक्षित वीर्य से इसकी बुद्धि दीस होती है। इस दीप्त बुद्धि से यह प्रभु-दर्शन करता है।
Subject
वीर्यशक्ति-सम्पन्न जितेन्द्रिय पुरुष [जितेन्द्रियता, वीर्यरक्षा]