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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 19/18/9

72 Sukta
10 Mantra
19/18/9
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- प्राजापत्या त्रिष्टुप् Suktam- सुरक्षा सूक्त
Mantra with Swara
प्र॒जाप॑तिं॒ ते प्र॒जन॑नवन्तमृच्छन्तु। ये मा॑ऽघा॒यवो॑ ध्रु॒वाया॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥

प्र॒जाऽप॑तिम्। ते। प्र॒जन॑नऽवन्तम्। ऋ॒च्छ॒न्तु॒। ये। मा॒। अ॒घ॒ऽयवः॑। ध्रु॒वायाः॑। दि॒शः। अ॒भि॒ऽदासा॑त् ॥१८.९॥

Mantra without Swara
प्रजापतिं ते प्रजननवन्तमृच्छन्तु। ये माऽघायवो ध्रुवाया दिशोऽभिदासात् ॥

प्रजाऽपतिम्। ते। प्रजननऽवन्तम्। ऋच्छन्तु। ये। मा। अघऽयवः। ध्रुवायाः। दिशः। अभिऽदासात् ॥१८.९॥

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1 Bhashyas
Meaning
१.(ये) = जो (अघायवः) = पाप को कामनावाले अशुभ विचार (मा) = मुझे (धुवाया:) = इस वेवादिक से [अध: प्रदेश से] (अभिदासात्) = क्षीण करना चाहते हैं, (ते) = वे (प्रजननवन्तम्) = प्रशस्त प्रजननवाले (प्रजापतिम्) = प्रजापति को (ऋच्छन्तु) = प्राप्त होकर नष्ट हो जाएँ। २.ध्रुवादिक् से मैं प्रजापति प्रभु को अपना रक्षण करता हुआ जानें। ये प्रभु मुझे गृहस्थ में पवित्र सन्तान के निर्माण की प्रेरणा देते हुए पापों से बचाएँ।
Essence
ध्रुवादिक से प्रजापति प्रभु मेरा रक्षण करते हैं। ये प्रभु मुझे उत्कृष्ट प्रजनन को प्रेरणा कराते हुए आसक्ति में नहीं फंसने देते और इसप्रकार मुझे पापों से दूर रखते हैं।
Subject
प्रशस्त प्रजनन व पाप-निराकरण