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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 19/18/6

72 Sukta
10 Mantra
19/18/6
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- आर्च्यनुष्टुप् Suktam- सुरक्षा सूक्त
Mantra with Swara
अ॒पस्त ओष॑धीमतीरृच्छन्तु। ये मा॑ऽघा॒यव॑ ए॒तस्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥

अ॒पः। ते। ओष॑धीऽमतीः। ऋ॒च्छ॒न्तु॒। ये। मा॒। अ॒घ॒ऽयवः॑। ए॒तस्याः॑। दि॒शः। अ॒भि॒ऽदासा॑त् ॥१८.६॥

Mantra without Swara
अपस्त ओषधीमतीरृच्छन्तु। ये माऽघायव एतस्या दिशोऽभिदासात् ॥

अपः। ते। ओषधीऽमतीः। ऋच्छन्तु। ये। मा। अघऽयवः। एतस्याः। दिशः। अभिऽदासात् ॥१८.६॥

Meaning
१. (ये) = जो (अघायव:) = अशुभ को चाहनेवाले पापभाव (मा) = मुझे (एतस्याः दिश:) = इस पश्चिम व उत्तर के बीच की दिशा से (अभिदासात्) = क्षीण करना चाहते हैं, (ते) = वे पापभाव (ओषधीमती:) = प्रशस्त ओषधियोंवाले (अप:) = सर्वव्यापक प्रभु को (ऋच्छन्तु) = प्रात होकर नष्ट हो जाएँ। २. प्रभु प्रदत्त ओषधि-वनस्पतिरूप सात्त्विक भोजन करते हुए हम पापवृत्तियों से दूर रहें। इन भोजनों के होने पर पापवृत्तियों का उद्भव ही नहीं होता।
Essence
पश्चिमोत्तरमध्यदिग्भाग से कोई पापभाव मुझपर आक्रमण नहीं कर सकता, इधर से प्रशस्त ओषधि-वनस्पतियों को लिये हुए व्यापक प्रभु मेरा रक्षण कर रहे हैं।
Subject
वानस्पतिक भोजन व पापवृत्तिक्षय

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