Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 19/18/5

72 Sukta
10 Mantra
19/18/5
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- स्वराडार्च्यनुष्टुप् Suktam- सुरक्षा सूक्त
Mantra with Swara
सूर्यं॒ ते द्यावा॑पृथि॒वीव॑न्तमृच्छन्तु। ये मा॑ऽघा॒यव॑ प्र॒तीच्याः॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥

सूर्य॑म्। ते। द्यावा॑पृथि॒वीऽव॑न्तम्। ऋ॒च्छ॒न्तु॒। ये। मा॒। अ॒घ॒ऽयवः॑। प्र॒तीच्याः॑।दि॒शः। अ॒भि॒ऽदासा॑त् ॥१८.५॥

Mantra without Swara
सूर्यं ते द्यावापृथिवीवन्तमृच्छन्तु। ये माऽघायव प्रतीच्याः दिशोऽभिदासात् ॥

सूर्यम्। ते। द्यावापृथिवीऽवन्तम्। ऋच्छन्तु। ये। मा। अघऽयवः। प्रतीच्याः।दिशः। अभिऽदासात् ॥१८.५॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (ये) = जो (अघायव:) = अशुभ को चाहनेवाले पापभाव (मा) = मुझे (प्रतीच्याः दिश:) = पश्चिम दिशा से (अभिदासात्) = उपक्षीण करना चाहते हैं, (ते) = वे (द्यावापृथिवीवन्तम्) = उत्तम मस्तिष्करूप धुलोक को तथा दृढ शरीररूप पृथिवीलोक को प्राप्त करानेवाले (सूर्यम्) = सूर्यसम ज्योतिबाले ब्रह्म को (ऋच्छन्तु) = प्राप्त होकर नष्ट हो जाएँ। २. इस पश्चिम दिशा से 'सूर्य' नामक प्रभु मेरा रक्षण कर रहे हैं। इधर से आनेवाले पापभाव सूर्य तक पहुँचते ही उस सूर्यसम दीत ज्ञानाग्नि में दग्ध हो जाते हैं। मुझतक नहीं पहुँच पाते।
Essence
पश्चिम दिशा से कोई पापभाव मुझपर आक्रमण नहीं कर सकता। इधर से 'सूर्य' नामक प्रभु मेरा रक्षण कर रहे हैं। सूर्य के समान ज्ञानज्योति को दीस करने से सब पाप उसमें भस्म हो जाते हैं।
Subject
सूर्यसम ज्ञानज्योति में