Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 19/18/1

72 Sukta
10 Mantra
19/18/1
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- साम्नी त्रिष्टुप् Suktam- सुरक्षा सूक्त
Mantra with Swara
अ॒ग्निं ते वसु॑वन्तमृच्छन्तु। ये मा॑ऽघा॒यवः॒ प्राच्या॑ दि॒शोऽभि॒दासा॑त् ॥

अ॒ग्निम्। ते। वसु॑ऽवन्तम्। ऋ॒च्छ॒न्तु॒। ये। मा॒। अ॒घ॒ऽयवः॑। प्राच्याः॑। दि॒शः। अ॒भि॒ऽदासा॑त्॥ १८.१॥

Mantra without Swara
अग्निं ते वसुवन्तमृच्छन्तु। ये माऽघायवः प्राच्या दिशोऽभिदासात् ॥

अग्निम्। ते। वसुऽवन्तम्। ऋच्छन्तु। ये। मा। अघऽयवः। प्राच्याः। दिशः। अभिऽदासात्॥ १८.१॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१.(ये) = जो (अघायवः) = [malicious, harmful] अशुभ को चाहनेवाले हानिकर भाव (प्राच्यः दिश:) = पूर्व दिशा की ओर से (मा) = मुझे (अभिदासात्) = [दसु उपक्षये] उपक्षीण [हिंसित] करना चाहें, (ते) = वे (वसुवन्तम्) = सब वसुओंवाले-निवास के लिए आवश्यक तत्त्वोंवाले (अग्निम्) = अग्रणी प्रभु को (ऋच्छन्तु) = [ऋच्छ-reach, fail in faculties] प्राप्त होकर क्षीणशक्ति हो जाएँ। २. इस पूर्वदिशा में अग्नि' प्रभु वसुओं के साथ मेरा रक्षण कर रहे हैं। जो भी दास्यवभाव इधर से मुझपर आक्रमण करता है, वह इस प्रभु को प्रास होकर नष्ट हो जाता है। प्रभु रक्षक हैं तो ये मुझ तक पहुँच ही कैसे सकते हैं?
Essence
पूर्वदिशा से कोई पाप मुझपर आक्रमण नहीं कर सकता। इधर तो 'अग्नि' नामक प्रभु मेरा रक्षण कर रहे हैं न? आगे बढ़ने की प्रवृत्ति 'अग्नि' मुझे अशुभ भावनाओं से बचाती हैं।
Subject
'आगे बढ़ने की भावना' व पापवृत्तियों का निराकरण