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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 19/16/2

72 Sukta
2 Mantra
19/16/2
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- त्र्यवसाना सप्तपदा बृहतीगर्भातिशक्वरी Suktam- अभय सूक्त
Mantra with Swara
दि॒वो मा॑दि॒त्या र॑क्षन्तु॒ भूम्या॑ रक्षन्त्व॒ग्नयः॑। इ॑न्द्रा॒ग्नी र॑क्षतां मा पु॒रस्ता॑द॒श्विना॑व॒भितः॒ शर्म॑ यच्छताम्। ति॑र॒श्चीन॒घ्न्या र॑क्षतु जा॒तवे॑दा भूत॒कृतो॑ मे स॒र्वतः॑ सन्तु॒ वर्म॑ ॥

दि॒वः। मा॒। आ॒दि॒त्याः। र॒क्ष॒न्तु॒। भूम्याः॑। र॒क्ष॒न्तु॒। अ॒ग्नयः॑। इ॒न्द्रा॒ग्नी इति॑। र॒क्ष॒ता॒म्। मा॒। पुरस्ता॑त्। अ॒श्विनौ॑। अ॒भितः॑। शर्म॑। य॒च्छ॒ता॒म्। ति॒र॒श्चीन्। अ॒घ्न्या। र॒क्ष॒तु॒। जा॒तऽवे॑दाः। भू॒त॒ऽकृतः॑। मे॒। स॒र्वतः॑। स॒न्तु॒। वर्म॑ ॥१६.२॥

Mantra without Swara
दिवो मादित्या रक्षन्तु भूम्या रक्षन्त्वग्नयः। इन्द्राग्नी रक्षतां मा पुरस्तादश्विनावभितः शर्म यच्छताम्। तिरश्चीनघ्न्या रक्षतु जातवेदा भूतकृतो मे सर्वतः सन्तु वर्म ॥

दिवः। मा। आदित्याः। रक्षन्तु। भूम्याः। रक्षन्तु। अग्नयः। इन्द्राग्नी इति। रक्षताम्। मा। पुरस्तात्। अश्विनौ। अभितः। शर्म। यच्छताम्। तिरश्चीन्। अघ्न्या। रक्षतु। जातऽवेदाः। भूतऽकृतः। मे। सर्वतः। सन्तु। वर्म ॥१६.२॥

Meaning
१. (दिव:) = इस घुलोक के (आदित्या:) = रश्मिभेद से उदय होने से बारह नामोंवाले ये आदित्य (मा रक्षन्तु) = मुझे रक्षित करे तथा (भूम्या:) = इस पृथिवी की (अग्नयः) = 'गार्हपत्य, दक्षिनाग्नि, आहवनीय' आदि अग्नियाँ (रक्षन्तु) = रक्षित करें। २. (इन्द्राग्नी) = शक्ति व प्रकाश के देव (मा) = मुझे (पुरस्तात्) = आगे से (रक्षताम्) = रक्षित करें। (अश्विनौ) = प्राणापान (अभितः) = दोनों ओर से-शरीर व मन दोनों के दृष्टिकोण से (शर्म) = कल्याण (यच्छताम्) = दें। शरीर को ये नौरोग बनाएँ और मन को पवित्र । ३. (जातवेदा:) = जिससे ज्ञान की उत्पत्ति होती है वह (अघ्न्या) = अहन्तव्य-सदा स्वाध्याय के योग्य वेदवाणी (तिरश्चीन् रक्षतु) = [तिरः अञ्च] टेढ़ी चालों को हमसे दूर रक्खे। हम स्वाध्याय के द्वारा कुटिलता से दूर होकर आर्जव के मार्ग को अपनाएँ। (भूतकृतः) = यथार्थ कर्मों के करनेवाले माता पिता, आचार्य (सर्वत:) = सब ओर से (मे) = मेरे (वर्म सन्तु) = कवच हों। इनकी शरण में सुरक्षित हुआ हुआ मैं बाल्य, यौवन में अपना ठीक परिपाक कर पाऊँ।
Essence
धुलोक के आदित्य व पृथिवी की अग्नियों मेरा रक्षण करें । बल व प्रकाश हमारे रक्षक हों। प्राणसाधना हमें स्वस्थ शरीर व निर्मल मनवाला बनाए । स्वाध्याय हमें सरलवृत्ति प्राप्त कराए तथा उत्तम माता-पिता व आचार्य कवच के समान हमारे रक्षक हों।।
Subject
स्वाध्याय द्वारा सरल जीवन

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