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Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 19/15/5

72 Sukta
6 Mantra
19/15/5
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- अथर्वा Chhanda- चतुष्पदा जगती Suktam- अभय सूक्त
Mantra with Swara
अभ॑यं नः करत्य॒न्तरि॑क्ष॒मभ॑यं॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे। अभ॑यं प॒श्चादभ॑यं पु॒रस्ता॑दुत्त॒राद॑ध॒रादभ॑यं नो अस्तु ॥

अभ॑यम्। नः॒। क॒र॒ति॒। अ॒न्तरि॑क्षम्। अभ॑यम्। द्यावा॑पृथि॒वी इति॑। उ॒भे इति॑। इ॒मे इति॑। अभ॑यम्। प॒श्चात्। अभ॑यम्। पु॒रस्ता॑त्। उ॒त्ऽत॒रात्। अ॒ध॒रात्। अभ॑यम्। नः॒। अ॒स्तु॒ ॥१५.५॥

Mantra without Swara
अभयं नः करत्यन्तरिक्षमभयं द्यावापृथिवी उभे इमे। अभयं पश्चादभयं पुरस्तादुत्तरादधरादभयं नो अस्तु ॥

अभयम्। नः। करति। अन्तरिक्षम्। अभयम्। द्यावापृथिवी इति। उभे इति। इमे इति। अभयम्। पश्चात्। अभयम्। पुरस्तात्। उत्ऽतरात्। अधरात्। अभयम्। नः। अस्तु ॥१५.५॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (न:) = हमारे लिए (अन्तरिक्षम्) = अन्तरिक्ष (अभयं करति) = निर्भयता करता है। (इमे ये उभे) = दोनों द्यावापृथिवी-द्युलोक व पृथिवीलोक (अभयम्) = निर्भयता करते हैं। २. (न:) = हमारे लिए (पश्चात्) = पीछे से (अभयम्) = निर्भयता हो। (पुरस्तात्) = आगे से (अभयम्) = अभय हो तथा (उत्तरात्) = ऊपर से व (अधरात्) = नीचे से (अभयम् अस्तु)=- निभर्यता हो । पश्चिम व पूर्व तथा उत्तर व दक्षिण सर्व दिशाओं से हमें अभय हो।
Essence
हमें त्रिलोकी व दिक्चतुष्टय सभी निर्भयता प्राप्त कराएँ।
Subject
'त्रिलोकी व चारों दिशाओं से अभय