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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 19/15/2

72 Sukta
6 Mantra
19/15/2
Devata- इन्द्रः Rishi- अथर्वा Chhanda- चतुष्पदा जगती Suktam- अभय सूक्त
Mantra with Swara
इन्द्रं॑ व॒यम॑नूरा॒धं ह॑वाम॒हेऽनु॑ राध्यास्म द्वि॒पदा॒ चतु॑ष्पदा। मा नः॒ सेना॒ अर॑रुषी॒रुप॑ गु॒र्विषू॑चीरिन्द्र द्रु॒हो वि ना॑शय ॥

इन्द्र॑म्। व॒यम्। अ॒नु॒ऽरा॒धम्। ह॒वा॒म॒हे॒। अनु॑। रा॒ध्या॒स्म॒। द्वि॒ऽपदा॑। चतुः॑ऽपदा। मा। नः॒। सेनाः॑। अर॑रुषीः। उप॑। गुः॒। विषू॑चीः। इ॒न्द्र॒। द्रु॒हः। वि। ना॒श॒य॒ ॥१५.२॥

Mantra without Swara
इन्द्रं वयमनूराधं हवामहेऽनु राध्यास्म द्विपदा चतुष्पदा। मा नः सेना अररुषीरुप गुर्विषूचीरिन्द्र द्रुहो वि नाशय ॥

इन्द्रम्। वयम्। अनुऽराधम्। हवामहे। अनु। राध्यास्म। द्विऽपदा। चतुःऽपदा। मा। नः। सेनाः। अररुषीः। उप। गुः। विषूचीः। इन्द्र। द्रुहः। वि। नाशय ॥१५.२॥

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1 Bhashyas
Meaning
१.(वयम्) = हम (अनुराधम्) = अनुकूलता से सिद्धियों को प्रास करानेवाले (इन्द्रम्) = शत्रु-विद्रावक प्रभु को (हवामहे) = पुकारते हैं। हम इस जीवन में (द्विपदा) = दो पाँबवाली अपनी वीरसन्तानों से तथा (चतुष्पदा) = चार पाँववाले गवादि पशुओं से (अनुराव्यास्म) = एक के बाद दूसरी-निरन्तर सिद्धियों को प्राप्त करें। हमारे सब कार्य अनुकूलता से सिद्ध होनेवाले हों। २. (न:) = हमें (अररुषी:) = अदान की वृत्तिवाली लोभ आदि आसुरभावों की (सेना:) = सेनाएँ (मा उपगुः) = मत समीपता से प्राप्त हों। हे (इन्द्र) = शत्रुविद्रावक प्रभो ! (विषूची:) = विविध दिशाओं में गतिवाली-नानारूपों में प्रकट होनेवाली (दूहः) = द्रोह की भावनाओं को (विनाशय) = आप नष्ट कर दीजिए।
Essence
हम द्वेष से-द्रोह की भावना से दूर रहते हुए, अदान की वृत्ति से ऊपर उठकर 'अनुराध' इन्द्र का आराधन करते हैं।
Subject
अनुराध इन्द्र का आह्वान