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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 19/13/6

72 Sukta
11 Mantra
19/13/6
Devata- इन्द्रः Rishi- अप्रतिरथः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Suktam- एकवीर सूक्त
Mantra with Swara
इ॒मं वी॒रमनु॑ हर्षध्वमु॒ग्रमिन्द्रं॑ सखायो॒ अनु॒ सं र॑भध्वम्। ग्रा॑म॒जितं॑ गो॒जितं॒ वज्र॑बाहुं॒ जय॑न्त॒मज्म॑ प्रमृ॒णन्त॒मोज॑सा ॥

इ॒मम्। वी॒रम्। अनु॑। ह॒र्ष॒ध्व॒म्। उ॒ग्रम्। इन्द्र॑म्। स॒खा॒यः॒। अनु॑। सम्। र॒भ॒ध्व॒म्। ग्रा॒म॒ऽजित॑म्। गो॒ऽजित॑म्। वज्र॑ऽबाहुम्। जय॑न्तम्। अज्म॑। प्र॒ऽमृ॒णन्त॑म्। ओज॑सा ॥१३.६॥

Mantra without Swara
इमं वीरमनु हर्षध्वमुग्रमिन्द्रं सखायो अनु सं रभध्वम्। ग्रामजितं गोजितं वज्रबाहुं जयन्तमज्म प्रमृणन्तमोजसा ॥

इमम्। वीरम्। अनु। हर्षध्वम्। उग्रम्। इन्द्रम्। सखायः। अनु। सम्। रभध्वम्। ग्रामऽजितम्। गोऽजितम्। वज्रऽबाहुम्। जयन्तम्। अज्म। प्रऽमृणन्तम्। ओजसा ॥१३.६॥

Meaning
१. हे (सखायः) = मित्रो! (इमं वीरम्) = इस वीर (इन्द्रम्) = शत्रु-विद्रावक प्रभु की (अनुहर्षध्वम्) = अनुकूलता में हर्ष का अनुभव करो और (अनुसंरभध्वम्) = इस प्रभु की अनुकूलता में ही सम्यक् उद्योगवाले बनो। २. ये प्रभु ही तुम्हारे लिए (ग्रामजितम्) = इन्द्रिय-समूह का विजय करनेवाले हैं। ये ही (गोजितम) = ज्ञान की वाणियों का विजय करनेवाले हैं और (वज्रबाहम्) = शत्रुओं के पराभव के लिए हाथों में वन लिये हुए हैं। ये तुम्हारे लिए अज्म (जयन्तम्) = संग्राम को जीतनेवाले (ओजसा प्रमृणन्तम्) = ओजस्विता से शत्रुओं को कुचल देनेवाले हैं।
Essence
प्रभु की अनुकूलता में हम हर्ष का अनुभव करें-वीरतापूर्ण कमों को करें । प्रभु हमारे लिए इन्द्रियों का विजय करेंगे, हमें ज्ञान की वाणियों को प्राप्त कराएंगे। प्रभु ही हमें संग्नामों में विजयी बनाएँगे।
Subject
'इन्द्रम्' अनु हर्षध्वम्, अनुसंरभध्वम्

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