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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 19/10/9

72 Sukta
10 Mantra
19/10/9
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- शान्ति सूक्त
Mantra with Swara
शं नो॒ अदि॑तिर्भवतु व्र॒तेभिः॒ शं नो॑ भवन्तु म॒रुतः॑ स्व॒र्काः। शं नो॒ विष्णुः॒ शमु॑ पू॒षा नो॑ अस्तु॒ शं नो॑ भ॒वित्रं॒ शम्व॑स्तु वा॒युः ॥

शम्। नः॒। अदि॑तिः। भ॒व॒तु॒। व्र॒तेभिः॑। शम्। नः॒। भ॒व॒न्तु॒। म॒रुतः॑। सु॒ऽअ॒र्काः। शम्। नः॒। विष्णुः॑। शम्। ऊं॒ इति॑। पू॒षा। नः॒। अ॒स्तु॒। शम्। नः॒। भ॒वित्र॑म्। शम्। ऊं॒ इति॑। अ॒स्तु॒। वा॒युः ॥१०.९॥

Mantra without Swara
शं नो अदितिर्भवतु व्रतेभिः शं नो भवन्तु मरुतः स्वर्काः। शं नो विष्णुः शमु पूषा नो अस्तु शं नो भवित्रं शम्वस्तु वायुः ॥

शम्। नः। अदितिः। भवतु। व्रतेभिः। शम्। नः। भवन्तु। मरुतः। सुऽअर्काः। शम्। नः। विष्णुः। शम्। ऊं इति। पूषा। नः। अस्तु। शम्। नः। भवित्रम्। शम्। ऊं इति। अस्तु। वायुः ॥१०.९॥

Meaning
१. (व्रतेभिः) = व्रतों के साथ (अदितिः) = [दिति दो अबखण्डने] अखण्डन-स्वास्थ्य की देवता (न:) = हमारे लिए शं भवतु-शान्ति देनेवाली हो। हम स्वस्थ व व्रतमय जीवनवाले बनकर शान्ति प्राप्त करें। (स्वर्का:) = [सु अर्काः] उत्तमता से प्रभु-पूजन करनेवाले (मरुतः) = प्राण (नः शं भवन्तु) = हमारे लिए शान्तिकर हों। हम प्राणसाधना करते हुए प्रभु-पूजन में प्रवृत्त हों। २. (न:) =-हमारे लिए विष्णुः [यज्ञो वै विष्णु:] यज्ञ (शम्) = शान्ति दें, (उ) = और (पूषा) = पोषण की देवता (न:) = हमारे लिए (शम् अस्तु) = शान्तिकर हो। हम यज्ञों को करते हुए (उ) = चित पोषण प्रास करें। (नः) = हमारे लिए (भवित्रम्) = [भवन्ति भूतानि अत्र] यह अन्तरिक्षलोक अथवा गृह (शम्) = शान्ति दे, (उ) = और (वायु:) = वायु (शम् अस्तु) = शान्तिकर हो। हमारे घरों में वायु का सम्यक् प्रवेश हो और इसप्रकार वे घर हमारे लिए सुखद हों।
Essence
हम व्रतमय स्वस्थ जीवनवाले हों। प्राणसाधना करते हुए प्रभु-पूजन करें। यज्ञों को करते हुए उचित पोषण प्राप्त करें। हमारे घरों में वायु का सम्यक् प्रवेश हो।
Subject
अदिति नतों के साथ

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